
नई दिल्ली, 30 जुलाई . बस्तर संभाग के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की. इस अवसर पर केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे.
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ बस्तर की सामाजिक परंपराओं के प्रमुख मांझी-चालकी और बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ संवाद किया. राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे बस्तरवासी इस बात के प्रमाण हैं कि जो बस्तर कभी नक्सली हिंसा के कारण अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और परंपराओं को खोता जा रहा था, वह आज नक्सलमुक्त होकर अपनी धरोहरों को सहेज रहा है.
उन्होंने कहा कि विकास के पथ पर आगे बढ़ चुका बस्तर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनकर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा.
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है; बल्कि यह बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों मंचों पर बस्तर की वास्तविक पहचान स्थापित करना है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने युवाओं को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है. ऐसे कार्यक्रम पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं और रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करते हैं.
राष्ट्रपति ने सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि वे समुदाय और प्रशासन के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हैं. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने समर्पण और नेतृत्व से समाज में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कार्य करते रहेंगे.
राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि सरकार के प्रयासों और बस्तर के लोगों की सक्रिय भागीदारी से आज बस्तर क्षेत्र विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि लोग हिंसा के वातावरण से निकलकर शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसरों से जुड़ रहे हैं. यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है. दूर-दराज के गांवों तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं. लंबे समय तक बंद रहे विद्यालयों में फिर से बच्चों की चहल-पहल दिखाई दे रही है और शिक्षा का प्रकाश घर-घर तक पहुंच रहा है. आज बस्तर में आशा, विश्वास और प्रगति का एक नया वातावरण निर्मित हो रहा है. यह परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है.
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदाय के युवा शिक्षा, विज्ञान, कला और खेल-कूद के क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. जनजातीय समुदाय के लोगों में खेल और कला की नैसर्गिक प्रतिभा होती है. उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि हाल ही में छत्तीसगढ़ में बस्तर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया था.
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि जनजातीय समुदाय के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते और इसे बढ़ावा देते हुए विकास यात्रा में भागीदारी करेंगे और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देंगे. उन्होंने कहा कि सहयोग और सद्भाव की संस्कृति को सुदृढ़ करना हम सब का कर्तव्य है. उन्होंने महिलाओं, बच्चों, समाज के वंचित वर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तीकरण के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने लोगों से जल, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आग्रह किया.
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एमएस/