बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है : रेखा गुप्ता

नई दिल्ली, 28 अप्रैल . दिल्ली विधानसभा में महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया. इस दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर तीखे हमले किए. रेखा गुप्ता ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को जितनी चर्चाएं लोकसभा में हुईं, वे बहुत ही निराशाजनक थीं.

दिल्ली विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि हर महिला लोकसभा की ओर देख रही थी कि 78 साल का इंतजार शायद अब खत्म होने वाला है. वर्षों से देश की महिलाएं यह इंतजार कर रही थीं कि उन्हें प्रतिनिधित्व मिलेगा, विधानसभाओं में, लोकसभा में और वहां पहुंचकर वे भी देश के नीति-निर्माण का हिस्सा बन पाएंगी. पर अफसोस, 16 और 17 अप्रैल को लोकसभा में हुई चर्चाएं बेहद निराशाजनक रहीं.

उन्होंने कहा कि आखिर महिला आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ी? यह एक बड़ा प्रश्न है जो हमारे समाज के सामने बार-बार आता है. हमारे देश में महिला और पुरुष की परिस्थितियां काफी अलग हैं. एक महिला जब समाज की अपेक्षाओं को अपने ऊपर लेकर चलती है, तो वह उसी गति से आगे नहीं बढ़ पाती, जिस गति से एक पुरुष बढ़ पाता है. यदि वह घर से बाहर निकलती है, तो उसे सैकड़ों सवालों के जवाब देने पड़ते हैं. ऐसे में जब संविधान हमें अवसर देता है, पार्टी हमें मौका देती है और जनता आशीर्वाद देती है, तब जाकर कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बन पाता है.

उन्होंने कहा कि संगठन में पार्टी ने हमें अवसर दिया, जनता ने आशीर्वाद दिया, तब जनसेवा की इस दहलीज पर मेरे जैसी दिल्ली के एक साधारण परिवार की बेटी ने कदम रखा. इसमें हमारे नेतृत्व और प्रधानमंत्री का भी आशीर्वाद मिला. आखिर क्या तकलीफ, क्या परेशानियां, क्या बाधाएं हैं, जिनके कारण महिलाएं विधानसभा और लोकसभा तक नहीं पहुंच पातीं? यह एक बड़ा प्रश्न है कि महिलाओं को यह अवसर क्यों नहीं मिलता. देश आजाद हुआ, संविधान बना, और जब संविधान बना, तब संविधान सभा में 15 महिलाएं भी थीं. उन्हें शायद यह अंदाजा नहीं था कि आजाद भारत के राजनीतिक दल महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकेंगे.

उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले से ही तय करके बैठा था कि वे इस विधेयक को पास नहीं होने देंगे, और इसी कारण उन्होंने कई तरह के अड़ंगे लगाए. मैं पूछना चाहती हूं, बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है?

उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि केजरीवाल साहब ने जेल जाने के बाद पूरी कोशिश की कि उनकी पत्नी डी-फैक्टो मुख्यमंत्री बन जाएं. समाज में विरोध हुआ तो आतिशी को आगे लाना पड़ा. लेकिन पूरी दुनिया ने देखा कि उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठने नहीं दिया गया. स्वाति मालीवाल ने एक पोस्ट कर अपने मन का दर्द भी जाहिर किया, जिसे ये सुन नहीं सके, इसलिए यहां से उठकर चले गए. एकमात्र महिला सांसद के साथ जो दुर्व्यवहार हुआ, वह पूरी दुनिया ने देखा.

एएमटी/एबीएम