जांच से पीछे नहीं हट रहा हूं, पूरे कार्यकाल की जांच करा ले सरकार: हरीश रावत

देहरादून, 21 सितंबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने आगामी सिद्धपीठों के दौरे की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि वह प्रदेश की धरती के प्रमुख सिद्धपीठों में जाकर वहां पूजा-अर्चना करेंगे और प्रसाद वितरित करेंगे. इसी दौरान रावत ने अपने पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच के लिए एक न्यायिक या जांच आयोग गठित किए जाने की मांग भी दोहराई. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय अलग-अलग जांच एजेंसियों के जरिए कार्रवाई या जांच कराने के बजाय उनके पूरे कार्यकाल की एक साथ जांच करा ली जानी चाहिए.

सिद्धपीठों के दौरे को लेकर हरीश रावत ने कहा कि वह प्रदेश की धरती के दिग्पाल माने जाने वाले चारू सिद्धों को प्रणाम करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह इस धरती पर रह रहे हैं और स्वस्थ होकर लौटे हैं, इसलिए सिद्धपीठों में जाकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं. इन धार्मिक स्थलों पर वह प्रसाद भी वितरित करेंगे. अपने इस कार्यक्रम को उन्होंने व्यक्तिगत आस्था और उत्तराखंड की धरती के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने से जोड़ा.

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में सिद्धपीठों का विशेष महत्व है और वह वहां जाकर अपनी श्रद्धा प्रकट करना चाहते हैं.

इसके साथ ही, हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच को लेकर एक बार फिर अपनी पुरानी मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ चुनाव के समय अलग-अलग केंद्रीय जांच एजेंसियों या अधिकारियों को भेजे जाने के बजाय एक बार उनके पूरे कार्यकाल की जांच के लिए जांच आयोग गठित कर दिया जाना चाहिए. अगर उनके कार्यकाल में किसी तरह की अनियमितता हुई है, अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है या उन्होंने आर्थिक लाभ अर्जित किया है, तो जांच आयोग के माध्यम से सब कुछ सामने आ जाएगा.

उन्होंने कहा कि उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच होने से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपने अधिकारों का किस तरह इस्तेमाल किया. पूर्व सीएम ने कहा कि वह जांच से पीछे नहीं हट रहे हैं. उनका कहना था कि अगर उनके कार्यकाल में कोई गलत कृत्य हुआ है या उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है, तो जांच के दौरान वह सामने आना चाहिए.

रावत ने कहा कि जांच आयोग के सामने उनके कार्यकाल से जुड़े सभी मामलों की पड़ताल हो सकती है और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है. बार-बार अलग-अलग मौकों पर अलग-अलग जांच कराए जाने के बजाय एक व्यापक जांच ज्यादा स्पष्ट स्थिति सामने ला सकती है.

हरीश रावत ने आगे कहा कि यदि उनके पूरे मुख्यमंत्री कार्यकाल की जांच के लिए आयोग बनाया जाता है तो इससे उत्तराखंड में एक नई राजनीतिक और प्रशासनिक परंपरा स्थापित हो सकती है. भविष्य में भी मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल की इसी तरह समीक्षा या जांच की व्यवस्था की जा सकती है. इससे मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान अधिक संयम और जवाबदेही के साथ काम करेंगे. अगर ऐसी व्यवस्था बनती है तो भविष्य में मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले लोगों को भी अपने फैसलों और अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर अधिक सावधानी बरतनी पड़ेगी.

उन्होंने भाजपा से अपनी इस मांग को स्वीकार करने की अपील की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से भाजपा सरकार को कई सुझाव दिए गए हैं, लेकिन उनमें से बहुत से सुझावों को सरकार ने स्वीकार नहीं किया.

पीएसके