मुझे इस वर्ष अपनी किताबों की रॉयल्टी नहीं मिली, भाजपा की हो सकती है भूमिका : ममता बनर्जी

कोलकाता, 4 अगस्त . तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से उन्हें अपनी लिखी हुई किताबों की रॉयल्टी मिलनी बंद हो गई है.

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर भी आरोप लगाया कि उनकी किताबों की रॉयल्टी रुकने के पीछे उसकी भी कुछ भूमिका हो सकती है.

ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव संदेश में कहा, “कुछ लोग मेरे बारे में तरह-तरह के झूठ फैलाते हैं. वे जानते हैं कि मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने कभी एक भी पैसा वेतन के रूप में नहीं लिया. आज तक मैंने सांसद पेंशन का भी एक पैसा नहीं लिया है. मैं अपनी किताबों की रॉयल्टी से जीवनयापन करती हूं लेकिन इस वर्ष मुझे रॉयल्टी नहीं मिली. निश्चित रूप से लोग भाजपा के डर से चुप हैं. पुस्तक मेले में लोगों ने मेरी किताबें खरीदीं, लेकिन आज तक मुझे उसकी रॉयल्टी नहीं मिली. निश्चित तौर पर इसके पीछे कोई खेल है.”

हाल के दिनों में ममता बनर्जी ने मीडिया से सीधे बातचीत कम कर दी है और वे अक्सर फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखती हैं. मंगलवार को भी उन्होंने इसी माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी.

इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा शासित व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक गतिविधियों में जानबूझकर बाधाएं डाली जा रही हैं और उनकी आवाजाही को सीमित किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “मुझे सड़कों पर निकलने नहीं दिया जा रहा है. मुझे राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा रही है. रैली निकालने के लिए मुझे अदालत से अनुमति लेनी पड़ती है. संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है. अन्य राजनीतिक दलों को अपने कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन हमें नहीं. जिला परिषदों और पंचायतों पर जबरन कब्जा किया जा रहा है.”

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने कभी अन्य कई राजनीतिक दलों की तरह विदेशी फंड स्वीकार नहीं किया, फिर भी पार्टी के सभी बैंक खाते जानबूझकर फ्रीज कर दिए गए हैं.

उन्होंने कहा, “लेकिन मैं एक बात कहना चाहती हूं. वे मुझे जितना रोकने की कोशिश करेंगे, मैं उतना ही मजबूती से वापसी करूंगी. उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि मैंने छात्र राजनीति की है, युवा राजनीति की है. मुझे कुर्सी की परवाह नहीं है, मुझे केवल लोगों की परवाह है.”

एएमटी/डीकेपी