बाड़मेर में पाकिस्तान सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माण गिराए गए

जयपुर, 19 जून (आईएएनए). ‘जीरो टॉलरेंस’ पॉलिसी के तहत और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) की एक संयुक्त टीम ने बाडमेर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माणों के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया.

यह कार्रवाई बाड़मेर जिले के गदरा रोड और चौहटन सब-डिविजन के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती गांवों में की गई. अधिकारियों ने पहले इन ढांचों का सर्वे किया था और कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करके 18 जून तक कथित अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया था.

हालांकि, समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जब निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो जिला प्रशासन, पुलिस और बीएसएफ ने गुरुवार को संयुक्त रूप से तोड़-फोड़ और हटाने का अभियान शुरू किया. इस अभियान में हमीरानी, ​​मलाना, केरकोरी, चौहटन, भालगांव और डेम्बा जैसे गांव शामिल थे, जहां अधिकारियों ने पक्के ढांचों की वैधता की जांच और पुष्टि की.

प्रशासन के अनुसार, यह कवायद सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की एक पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास संवेदनशील इलाकों में अनधिकृत निर्माणों की पहचान करना और उन्हें हटाना है.

अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई सुरक्षा निर्देशों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की गई और प्रभावित पक्षों को पहले ही नोटिस दिए गए थे. प्रशासन का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना है.

हालांकि, इस कार्रवाई से स्थानीय समुदाय के कुछ हिस्सों में नाराजगी पैदा हो गई है. स्थानीय लोग और जन-प्रतिनिधि इस कार्रवाई के समय और तरीके, दोनों पर सवाल उठा रहे हैं. प्रभावित समुदाय के लोगों ने तोड़-फोड़ की कार्रवाई को अनुचित बताया है और आरोप लगाया है कि यह अभियान शुरू करने से पहले उनसे ठीक से बातचीत नहीं की गई थी.

इस मुद्दे ने राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया है. कार्रवाई से पहले, कांग्रेस प्रभारी और बायतू के विधायक हरीश चौधरी और बाड़मेर-जैसलमेर के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इस कदम का विरोध करते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक फायदे के लिए की जा रही है और चेतावनी दी कि संवेदनशील सीमावर्ती इलाके को राजनीतिक अखाड़ा न बनाया जाए.

नेताओं ने कहा, “सीमावर्ती इलाका किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं बनना चाहिए. ऐसी कार्रवाइयों से थार क्षेत्र में सदियों से चले आ रहे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को नुकसान पहुँचने का खतरा है.”

कांग्रेस प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से भी मुलाकात की और इस अभियान पर औपचारिक रूप से आपत्ति जताई. उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय निवासियों और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत किए बिना इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करना अनुचित था.

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की गई है और उसे लागू किया गया है. इसका मकसद आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी की मदद से घुसपैठ, ड्रग तस्करी और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल सीमा-पार नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है.

इस योजना के तहत, राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले को ‘स्पेशल वॉच ज़ोन’ (खास निगरानी वाले इलाके) के तौर पर तय किया गया है. अब बीएसएफ, जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और केंद्र व राज्य की इंटेलिजेंस एजेंसियां ​​एक ही कमांड स्ट्रक्चर के तहत काम करेंगी.

इस पहल का मकसद भारत-पाकिस्तान सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे में होने वाली सभी गतिविधियों में पूरी पारदर्शिता, बेहतर निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कायम करना है, ताकि किसी भी संदिग्ध या गैर-कानूनी गतिविधि का तुरंत पता लगाकर उसे रोका जा सके.

ओपी/पीएम