दीपक प्रकाश मामले में वकील सुदीप चंद्रा बोले, विधायी सदन के सदस्य नहीं तो फिर मंत्री नहीं रह सकते

नई दिल्ली, 15 जून . Supreme Court ने बिहार सरकार में दोबारा पंचायती राज मंत्री बनने वाले दीपक प्रकाश को नोटिस जारी किया है. मंत्री के अलावा कोर्ट ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग को भी नोटिस जारी किया है.

कोर्ट का यह नोटिस उस याचिका पर दिया गया है, जिसमें याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह का तर्क है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं, इसलिए राज्य सरकार के मंत्रालय में कोई पद नहीं संभाल सकते. याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई व्यक्ति जो विधायक नहीं है, वह लगातार छह महीने तक मंत्री रह सकता है, लेकिन इस दौरान उसे राज्य विधानमंडल की सदस्यता हासिल करनी होगी. यह छूट सिर्फ एक बार मिलने वाला मौका है और सरकार बदलने पर इसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

इस पूरे मामले को लेकर याचिकाकर्ता के वकील सुदीप चंद्रा ने से बात करते हुए कहा कि शिकायत यह थी कि दीपक प्रकाश बिहार में पंचायती राज विभाग के मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे और बिना विधायी सदन के लिए चुने गए भी इस पद पर बने हुए थे. यह मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जुड़ा है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को मंत्री बनाया जा सकता है, भले ही वह विधायक या एमएलसी न हो, लेकिन वे इस पद पर सिर्फ छह महीने तक ही रह सकते हैं. इस समय-सीमा के बाद वे तब तक मंत्री नहीं बने रह सकते जब तक कि वे विधायी सदन के सदस्य न बन जाएं.

उन्होंने कहा कि हाल ही में एमएलसी चुनाव हुए. दावा किया जा रहा था कि दीपक प्रकाश एमएलसी बनेंगे, लेकिन उन्होंने एमएलसी के लिए नामांकन दाखिल नहीं किया. इस तरह से वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में उनका मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है.

वकील ने आगे बताया कि दीपक प्रकाश का मंत्री बनने के बाद जो छह महीने का कार्यकाल था, वह 20 नवंबर 2025 से शुरू हुआ और 15 अप्रैल 2026 को खत्म हुआ. दीपक प्रकाश चार महीने 26 दिन के लिए मंत्री रहते हैं. इसके बाद बिहार में सत्ता का बदलाव होता है. सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनते हैं और इस मंत्रिमंडल में दोबारा दीपक प्रकाश को पंचायती राज विभाग का मंत्री बनाया जाता है.

वकील के अनुसार, पंजाब में इसी तरह का मामला आया था. आप छह महीने के टाइम स्लॉट में एक बार मंत्री बन सकते हैं. अगर आप किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं तो फिर मंत्री नहीं बन सकते.

उन्होंने कहा कि Supreme Court में याचिका की सुनवाई के दौरान मेरी मांग यह थी कि उन्हें पद से हटाया जाए. कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. मंत्री के तौर पर जो भी उन्होंने फैसले लिए हैं, उस पर रोक लगाने का आदेश दिया है.

डीकेएम/वीसी