
मुंबई, 27 सितंबर . दिशा सालियान मामले में वकील नीलेश ओझा ने सीबीआई को चिट्ठी सौंपी है और सुरक्षा की मांग की. मुंबई में से बातचीत में वकील नीलेश ओझा ने कहा कि कल जो चिट्ठी भेजी गई थी, वह सीबीआई को सौंपी गई और उसकी कॉपी सभी को दी गई. इसमें खास तौर पर कुछ मांगें की गई हैं.
वकील नीलेश ओझा ने कहा कि सतीश सालियान और हमने केस लड़ा और हमारे द्वारा उठाए गए सभी मुद्दे सही पाए गए. मुंबई पुलिस, मालवणी पुलिस स्टेशन और एसआईटी की धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ. कोर्ट ने अपने 44 पेज के आदेश में उनकी धोखाधड़ी और मुंबई पुलिस की गलत हरकतों का विस्तार से जिक्र किया है. कोर्ट ने मुंबई पुलिस की एसआईटी रिपोर्ट को खारिज कर दिया और सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया. इसी के मुताबिक, सतीश सालियान के बयान के आधार पर एफआईआर भी दर्ज की गई.
उन्होंने कहा कि हमारे पत्र में तीन मुद्दे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आदित्य ठाकरे और डिनो मोरिया मुंबई में ड्रग्स का धंधा करते हैं. गैंगरेप और मर्डर के मुख्य आरोपी के खिलाफ हमने सारे सबूत और पेन ड्राइव भी दे दी है. हमारे पास और भी प्रत्यक्षदर्शी हैं. अगर जरूरत होगी तो हम सीबीआई को और भी सबूत देंगे.
सुरक्षा के मुद्दे का जिक्र करते हुए वकील ने कहा कि जो इस मामले में आरोपी हैं, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई है, लेकिन जो केस लड़ रहा है, उसे सुरक्षा नहीं है. अगर हमारे किसी व्यक्ति की जान को खतरा होता है, तो इसके लिए पहले आरोपी मुंबई पुलिस कमीश्नर देवेंद्र भारती होंगे.
दूसरी बात, इस बिंदु पर गौर करें. Supreme Court का यह तय कानून है कि जब भी किसी गंभीर मामले में ऐसी एफआईआर या जांच होती है—भले ही एफआईआर दर्ज न की गई हो और विभागीय जांच भी शुरुआती तौर पर चल रही हो—तो सबसे पहली बात यह है कि हाई कोर्ट के आदेश में शुरुआती सबूत स्थापित हो चुके हैं, जिसमें पुलिस द्वारा बनाए गए झूठे रिकॉर्ड भी शामिल हैं.
ओझा ने बताया कि मामले से जुड़े लोगों को धमकियों को देखते हुए चार व्यक्तियों को पुलिस सुरक्षा देने की मांग की गई है. इनमें समीर वानखेड़े, सतीश सालियान, आशुतोष पाठक और स्वयं नीलेश ओझा शामिल हैं. इस संबंध में भी सीबीआई को पत्र दिया गया है.
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डीकेएम/वीसी