भारत और अजरबैजान के साझा हित शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने लिए है: एस जयशंकर

बाकू, 23 अक्टूबर . विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अजरबैजान के साझा हित शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने में हैं. उन्होंने आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता को दोनों देशों का ‘साझा दुश्मन’ बताया.

अजरबैजान की राजधानी बाकू में विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य देते हुए जयशंकर ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने का रास्ता खुलेगा. उन्होंने दोहराया कि भारत का स्पष्ट रुख है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए किया जाना चाहिए.

जयशंकर ने कहा, “हम इस क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों पर सावधानीपूर्वक नजर रख रहे हैं. हम पिछले साल अगस्त में अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे स्थायी शांति स्थापित होगी. भारत का स्पष्ट रुख है कि विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत में मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, यूरोप और यूरेशिया के घटनाक्रमों पर चर्चा हुई. साथ ही, इन संघर्षों के वैश्विक प्रभावों का आकलन किया गया. उन्होंने कहा कि इन संघर्षों के कारण वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की अर्थव्यवस्थाओं के सामने खाद्य पदार्थों, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पैदा हुई हैं.

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अजरबैजान के बीच शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा देने के साझा हित हैं. आतंकवाद, संघर्ष और अस्थिरता दोनों देशों के साझा दुश्मन हैं. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों में सुधार तथा उनके विस्तार पर भी चर्चा का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को समकालीन जरूरतों के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनाने की आवश्यकता है.

जयशंकर ने कहा कि बैरामोव के साथ उनकी बातचीत काफी उपयोगी रही और इससे दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा तय करने में मदद मिली है. उन्होंने अजरबैजान के विदेश मंत्री को सुविधानुसार जल्द भारत आने का निमंत्रण भी दिया.

जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. इसमें व्यापार, निवेश और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और ऐसे में द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं. दोनों पक्षों ने विभिन्न गतिविधियों और आपसी आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा की.

विदेश मंत्री ने वैश्वीकृत अर्थव्यवस्था में कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत और अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) से जुड़े हुए हैं. इस परियोजना में ईरान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने इस गलियारे के संबंध में आपसी समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई है. हवाई संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिदिन उड़ानें संचालित होती हैं, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के लिए हवाई संपर्क के विस्तार की संभावनाओं पर विचार करना होगा.

जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान ईरान से भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को निकालने में अजरबैजान की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “अजरबैजान में हमारे भारतीय छात्र हैं. मैं उनकी जिस देखभाल और संवेदनशीलता के साथ आप देखभाल करते हैं, उसके लिए आपको धन्यवाद देना चाहता हूं. इस साल की शुरुआत में ईरान में संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों, विशेषकर छात्रों को वहां से निकालने में आपकी सहायता के लिए भी मैं विशेष रूप से आभार व्यक्त करना चाहता हूं.”

इससे पहले, जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की. उन्होंने इस बातचीत को केंद्रित और भविष्य की दिशा तय करने वाली बताया. जयशंकर ने कहा कि बाकू पहुंचने के तुरंत बाद उन्होंने राष्ट्रपति अलीयेव से मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं. उन्होंने बताया कि बैठक में दोनों देशों के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई. इसमें मौजूदा सहयोग, सहयोग के नए क्षेत्रों और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने की संभावनाओं पर विचार किया गया.

जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर रणनीतिक दृष्टिकोण से भी विचारों का आदान-प्रदान किया. उन्होंने कहा कि भारत और अजरबैजान दोनों स्वतंत्र सोच वाले देश हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने फैसले स्वयं लेते हैं. विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और जन-स्तरीय संबंधों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की संस्कृति और मूल्यों का सम्मान करते हैं, जो आधुनिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए एक अच्छी नींव प्रदान करता है.

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डीएससी