
नई दिल्ली, 10 अगस्त . स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्ल्याना स्थित भारतीय दूतावास के परिसर को भारत विरोधी तत्वों ने क्षतिग्रस्त किया. भारत ने कड़े शब्दों में इसकी निंदा की है साथ ही घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिक परिसरों की सुरक्षा और उनकी पवित्रता सुनिश्चित करना अनिवार्य है. मंत्रालय ने इस मामले को नई दिल्ली और ल्युब्ल्याना, दोनों स्तरों पर स्लोवेनियाई अधिकारियों के समक्ष मजबूती से उठाया है.
एमईए ने कहा कि इस तरह की निंदनीय घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. साथ ही, मंत्रालय ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से ऐसे समूहों की ओर से फैलाए जा रही घृणा और दुष्प्रचार का संज्ञान लेने का आग्रह किया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और स्लोवेनिया अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
पिछले महीने, राजदूत अमित नारंग ने स्लोवेनिया के विदेश एवं यूरोपीय मामलों के मंत्री टोने काजर से मुलाकात की थी. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी.
इसकी जानकारी देते हुए भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा, “राजदूत अमित नारंग ने मंत्री टोने काजर से मुलाकात की. राजदूत ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का खत उन्हें सौंपा.”
इसमें आगे कहा गया कि बातचीत काफी सफल रही और विभिन्न मुद्दों पर बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में बात हुई.
24 जून को सचिव (पश्चिम ) एंबेसडर सिबी जॉर्ज ने स्लोवेनिया गणराज्य के राष्ट्रीय दिवस समारोह में हिस्सा लिया था. इसकी जानकारी एक्स के जरिए एमईए ने दी. बताया कि स्लोवेनिया ने सीमा पार आतंकवाद से लेकर हर क्षेत्र में भारत के साथ खड़े रहने का वादा दोहराया.
भारत और स्लोवेनिया के बीच राजनयिक संबंध 1992 में स्थापित हुए थे और भारत का दूतावास ल्युब्ल्याना में 2007 से कार्यरत है. ऐसे में भारतीय राजनयिक परिसर में तोड़फोड़ या उसे नुकसान पहुंचाने की घटना को भारत ने गंभीरता से लिया है.
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केआर/