‘1975 वर्ल्ड कप की जीत से प्रेरणा लेगी भारतीय हॉकी टीम’, वेल्स के खिलाफ मैच से पहले बोले कोच फुल्टन

एम्स्टर्डम, 15 अगस्त . बेल्जियम और नीदरलैंड्स की संयुक्त मेजबानी में शनिवार से एफआईएच पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का आगाज होने जा रहा है. टूर्नामेंट में भारत के ओपनिंग मुकाबले से पहले हेड कोच क्रेग फुल्टन ने कहा कि उनकी टीम 1975 में देश की वर्ल्ड कप जीत से प्रेरणा लेते हुए शानदार प्रदर्शन करेगी.

आठ बार ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम अपनी 1975 की वर्ल्ड कप जीत की गोल्डन जुबली मना रही है. कोच फुल्टन ने कहा कि वह जीत 2026 के कैंपेन के लिए बड़ी प्रेरणा होगी, जिसकी शुरुआत वे शनिवार को नीदरलैंड के एमस्टेलवीन में वैगनर हॉकी स्टेडियम में वेल्स के खिलाफ करेंगे.

ओपनिंग मैच से एक दिन पहले, भारत के कोच फुल्टन और वेल्स के हेड कोच डैनी न्यूकॉम्बे ने अपने आने वाले मैच, पूरे कैंपेन और टूर्नामेंट की तैयारियों पर अपने विचार साझा किए. पूल डी में भारत और वेल्स के अलावा इंग्लैंड और पाकिस्तान बाकी दो टीमें हैं.

भारतीय कोच ने कहा कि उनकी टीम की तैयारी लगातार अच्छा खेलने, दबाव में बेहतर फैसले लेने और अपनी ‘प्रेस-काउंटर-आउटकम फिलॉसफी’ को अपनाने पर केंद्रित रही है. यह हमारे लिए एक खास साल है. भारत की वर्ल्ड कप जीत को 50 साल हो गए हैं. वह इतिहास इस कैंपेन के लिए असली प्रेरणा देता है. हमारी तैयारी लगातार अच्छा खेलने, दबाव में बेहतर फैसले लेने और अपनी ‘प्रेस-काउंटर-आउटकम फिलॉसफी’ को अपनाने पर केंद्रित रही है.

फुल्टन ने कहा कि टीम एक बार में एक मैच पर ध्यान देगी ताकि वे खिताब के लिए मुकाबला करने की सबसे अच्छी स्थिति में आ सकें.

उन्होंने कहा, “खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता शानदार रही है – वे स्टैंडर्ड तय कर रहे हैं और हर दिन एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. हम जानते हैं कि मुकाबला कितना मुश्किल होगा, लेकिन हमें अपने प्रोसेस पर भरोसा है. हमारा तरीका सरल है. एक बार में एक गेम, पूरी ताकत लगाना, उस विरासत का सम्मान करना और खिताब के लिए मुकाबला करने की सबसे अच्छी स्थिति में आना.”

पूल डी के अपने ओपनिंग मैच से पहले, वेल्स के हेड कोच डैनी न्यूकॉम्बे ने कहा, “लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करना इस खास ग्रुप की प्रतिबद्धता और क्वालिटी का सबूत है. हमें यहां होने पर गर्व है और हमारा मकसद साफ है, दुनिया की सबसे अच्छी टीमों का मुकाबला करना. यह वह चुनौती है जिसे हमने अपनी मेहनत से हासिल किया है और हम इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं.”

एसएम/एबीएम