
नई दिल्ली, 5 अगस्त . मानसून सत्र के दौरान बुधवार को संसद में किसानों के मुद्दे से लेकर सोशल मीडिया और संसदीय कार्यवाही तक कई विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई. सपा, टीएमसी, जेएमएम और अकाली दल के सांसदों ने सरकार पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर निशाना साधा.
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, “फसल की कोई कमी नहीं है; खाद की कमी है. उत्पादन की कोई कमी नहीं है; किसान कड़ी मेहनत कर रहे हैं. सरकार को किसानों को समय पर खाद और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि कृषि उत्पादन प्रभावित न हो.”
सोशल मीडिया पर अकाउंट डिलीट किए जाने के मुद्दे को उठाते हुए डिंपल यादव ने सरकार पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, “आजकल सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट किए जा रहे हैं. ज्यादा फॉलोअर्स वाले युवाओं के अकाउंट क्यों हटाए जा रहे हैं? सरकार के खिलाफ बोलने वाले या रील्स पोस्ट करने वालों के अकाउंट क्यों डिलीट किए जा रहे हैं? सरकार देश को कहां ले जाना चाह रही है? अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है.”
सदन की कार्यवाही पर बोलते हुए डिंपल यादव ने कहा, “देश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, ये कौन नहीं चाहता? लेकिन भारतीय जनता पार्टी देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है, इसीलिए वे नहीं चाहते कि सदन चले, या वे चाहते हैं कि सदन सिर्फ उनकी मनमानी शर्तों के अनुसार ही चले. सरकार विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दे रही और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है.”
समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने भी सदन न चलने को लेकर सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा, “विपक्ष चर्चा की मांग कर रहा है. सदन तभी चलता है जब सरकार चाहती है और जब वह नहीं चाहती तो नहीं चलता. सरकार इस मुद्दे से बच रही है. वह डरी हुई है. मुझे नहीं पता कि किस डर की वजह से वह सीधे सदन में नहीं आ रही है. हम इस पर चर्चा चाहते हैं.”
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने विपक्ष के हंगामे को लेकर कहा, “करीब 133 सदस्य 410 से ज्यादा सांसदों के अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं. हम अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते हैं ताकि मंत्री उन्हें सुन सकें. लेकिन वे रोज आते हैं, एक-दो मुद्दों पर हंगामा करते हैं, और जब उनसे उन पर चर्चा करने के लिए कहा जाता है, तो वे इसके लिए तैयार नहीं होते. चर्चा से भागना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है.”
टीएमसी सांसद मेनका गुरुस्वामी ने न्यायपालिका और संसदीय लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “सरकार ने संसदीय लोकतंत्र का क्या हाल कर दिया है? सरकार और स्पीकर कंटेंट पर रोक लगा रहे हैं. हम राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं. यहां तक कि जो बिल पेश किया जा रहा था, वह जजों की संख्या चार बढ़ाने के लिए था. हम न्यायपालिका पर चर्चा करना चाहते थे. मिस्टर तन्खा बोलने के लिए खड़े हुए, और मैं भी बोलने के लिए खड़ी हुई. मैंने इस बारे में बात की कि आप अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं या एलजीबीटी समुदाय के लोगों को जज के तौर पर नियुक्त नहीं करते हैं. आप सिर्फ उन्हीं लोगों को नियुक्त करते हैं जो आपकी विचारधारा को मानते हैं. आप धार्मिक अल्पसंख्यकों के सदस्यों को भी नियुक्त नहीं करते”
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने राज्य सरकार के फैसले की जानकारी दी. उन्होंने कहा, “हमारे मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि वे एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन कर रहे हैं. यह समिति उनसे मिलेगी, बातचीत करेगी, और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करेगी.”
मानसून सत्र में हंगामे के कारण कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है. विपक्ष का कहना है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर बहस से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा.
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एससीएच/डीकेपी