
यरूशलम, 28 जून . इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता से शुक्रवार को इजरायल और लेबनान के बीच हस्ताक्षर किया गया फ्रेमवर्क समझौता, संघर्ष को खत्म करने और दोनों देशों के बीच शांति समझौते तक पहुंचने का रास्ता बनाता है.
शनिवार को येरुशलम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम नेतन्याहू ने कहा कि “यह समझौता इजरायल और लेबनान को मजबूत करता है और ईरान और हिज्बुल्लाह को कमजोर करता है. यह आने वाली चीजों का संकेत है.”
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, पीएम नेतन्याहू ने आगे कहा कि समझौते के तहत, अमेरिका और लेबनान इजरायल के दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा जोन बनाए रखने के अधिकार को मान्यता देते हैं, जब तक यह इजरायल की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
उन्होंने कहा कि इजरायली सेना तब तक सुरक्षा जोन पर कब्जा बनाए रखेगी जब तक हिज्बुल्लाह और दूसरे आतंकी संगठन हथियार नहीं छोड़ देते.
नेतन्याहू ने कहा कि फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में सुरक्षा जोन की उत्तरी सीमा के पास दो इलाके शामिल हैं, जिनकी सलाह इजरायली सेना ने दी है, जहां हिज्बुल्लाह को खत्म करने और इलाके को लेबनानी सेना के कंट्रोल में देने के लिए एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया जाएगा.
उन्होंने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल ने 9,000 से ज्यादा हिज्बुल्लाह मिलिटेंट्स को मार गिराया और समूह के 150,000 मिसाइलों और रॉकेट के स्टॉक का लगभग 90 फीसदी नष्ट कर दिया है.
शुक्रवार को, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि इजरायल और लेबनान हमेशा चलने वाली शांति और सुरक्षा के लिए एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर पहुंच गए हैं.
वाशिंगटन, डीसी में राजदूत स्तर की बातचीत के नए राउंड के आखिर में साइन किए गए इस एग्रीमेंट में दोनों देशों के बीच एक नाजुक सीजफायर को फिर से लागू करने की बात कही गई.
इस दौरान अमेरिकी विदेश सचिव रुबियो ने कहा, “आज का दिन अच्छा है क्योंकि हमें यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि लेबनान की संप्रभु सरकार और इजरायल सरकार के बीच एक फ्रेमवर्क समझौता हुआ, जो पक्की शांति और सुरक्षा के लिए एक फ्रेमवर्क बनाना शुरू करता है.”
इस फ्रेमवर्क का मकसद लेबनान की संप्रभुता को वापस लाना, हिज्बुल्लाह के मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म करना और सुरक्षा के खतरे खत्म होने के बाद इजरायली सेना को अपनी सीमाओं पर लौटने में मदद करना है.
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केके/पीएम