उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग पर रोक लगाना उचित नहीं: सैयद कासिम रसूल इलियास

नई दिल्ली, 13 सितंबर . जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग का एबीवीपी द्वारा विरोध किए जाने पर उनके पिता और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एबीवीपी पर निशाना साधा. उन्होंने स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं दिए जाने को गलत बताते हुए इसे एबीवीपी की दादागिरी करार दिया.

नई दिल्ली में से बातचीत में सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि कानूनी सिद्धांत के अनुसार जब तक किसी व्यक्ति को अदालत दोषी साबित नहीं करती, तब तक उसे निर्दोष माना जाता है. इसी आधार पर डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग पर रोक लगाना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि उमर खालिद के खिलाफ लगाए गए आरोपों और चार्जशीट को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं. करीब छह वर्ष बीत जाने के बावजूद मामले में अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ है, जिसकी वजह से जमानत मिलने में भी देरी हो रही है.

पश्चिम बंगाल में मदरसों को जारी किए गए नोटिस को लेकर इलियास ने भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में मदरसों के खिलाफ अलग-अलग तरह की कार्रवाई की जा रही है.

उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर मदरसों को बंद करने या उनके खिलाफ कार्रवाई के कदम उठाए गए हैं. किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश संविधान की भावना के खिलाफ है. मदरसों में धार्मिक शिक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रावधानों का भी जिक्र किया. इलियास ने कहा कि असम और उत्तराखंड के बाद पश्चिम बंगाल में भी मदरसों से संबंधित कार्रवाई का मामला सामने आया है.

सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने के मामले पर उन्होंने दावा किया कि संबंधित मस्जिद करीब 100 वर्ष पुरानी थी और उसके स्वामित्व तथा वक्फ से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे. उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने मस्जिद को सील करने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने उसे गिरा दिया. उन्होंने इस कार्रवाई को गलत और असंवैधानिक बताया.

मदरसों और अन्य मुद्दों को लेकर इलियास ने बताया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड 17 सितंबर से नवंबर के अंत तक ‘संविधान बचाओ, भारत बचाओ’ थीम के तहत देशभर में अभियान चलाएगा. इस अभियान के माध्यम से संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता और संबंधित मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया जाएगा.

डीकेएम/वीसी