झारखंड राज्यसभा चुनाव: बैजनाथ राम और परिमल नथवानी की जीत, कांग्रेस की हार पर सियासत

रांची, 18 जून . झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों सामने आ चुके हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा. परिणाम आने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

राज्यसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम ने सभी समर्थकों और विधायकों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि मैं उन सभी विधायकों और मुख्यमंत्री का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं और आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया.

एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवानी की जीत पर विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इसे विधायकों के विवेकपूर्ण निर्णय का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में सभी 81 विधायक मतदाता होते हैं और वे राज्य तथा देश के हितों को ध्यान में रखते हुए मतदान करते हैं. उन्होंने कहा कि परिमल नथवानी पहले भी 12 वर्षों तक झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं. उनके कार्यों को लोगों ने करीब से देखा है और विधायक उन्हें अच्छी तरह जानते हैं. ऐसे में यदि विधायकों ने समर्थन कर उन्हें जिताया है तो इसके लिए सभी विधायकों को धन्यवाद.

वहीं, भाजपा विधायक कुशवाहा शशि भूषण मेहता ने दावा किया कि एनडीए को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिला. उन्होंने कहा कि हमारे एनडीए गठबंधन को 28 वोट मिले, जेएमएम को 30 वोट मिले और कांग्रेस को केवल 20 वोट मिले.

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि पार्टी सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि हम हार गए हैं और हमने नतीजे को स्वीकार कर लिया है. अब हम चर्चा के लिए बैठेंगे. हमारे प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय नेतृत्व इस पूरे मामले पर विचार-विमर्श करेंगे और फिर आगे की राह तय करेंगे.

चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए राजेश ठाकुर ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई है. सांसदों की खरीद-फरोख्त और विधायकों का लेन-देन हो रहा है. जब तक सभी तथ्य सामने नहीं आ जाते, तब तक कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता, लेकिन भारतीय जनता पार्टी कॉरपोरेट हितों के साथ मिलकर लोकतंत्र की खरीद-फरोख्त कर रही है.

कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद गठबंधन में दरार की चर्चाओं को कांग्रेस प्रभारी के राजू ने खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि जेएमएम और कांग्रेस पूरी तरह एकजुट हैं. जेएमएम के पास 34 विधायक हैं. इनमें से 30 वोट जेएमएम उम्मीदवार को और 4 वोट कांग्रेस को मिले. कांग्रेस के 16 विधायकों ने भी पार्टी उम्मीदवार को वोट दिया. इस तरह हमें कुल 20 वोट मिले. इसलिए यह कहना गलत होगा कि जेएमएम और कांग्रेस में कोई मतभेद है.

जेएमएम सांसद महुआ माजी ने भी गठबंधन की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने अनुशासन का पालन किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम के हर विधायक ने हमारे उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया. एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ और न ही किसी विधायक ने पार्टी के साथ धोखा किया. सभी वोट हमारे प्रत्याशी को मिले हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए ने चुनाव से पहले रणनीतिक तैयारी की थी. उन्होंने कहा कि एनडीए के नेता पहले से दावा कर रहे थे कि वे जीतेंगे. इससे लगता है कि उन्होंने पहले ही उन लोगों से बात कर ली थी जिन्होंने बाद में उन्हें वोट दिया. यह एनडीए का पुराना तरीका है. महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को तोड़ने से लेकर एनसीपी, टीएमसी और आम आदमी पार्टी के नेताओं को अपने साथ लाने की कोशिशें इसका उदाहरण हैं.

महुआ माझी ने जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत पर खुशी जताई, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार की हार को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि हम अपने उम्मीदवार को जीत की बधाई देते हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इतने अच्छे उम्मीदवार को मैदान में उतारा. उनकी जीत से पार्टी में खुशी की लहर है, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार की हार को लेकर हमें दुख है. हमारे पास जो आंकड़े थे, उन्हें देखते हुए सभी लोग जीत को लेकर आश्वस्त थे. दोपहर तक किसी को भी अंदाजा नहीं था कि इस तरह की स्थिति बन सकती है.

पीएसके/डीकेपी