
बेंगलुरु, 21 सितंबर . भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोमवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक नक्सलियों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है. उन्होंने राज्य में वामपंथी उग्रवाद से जुड़ी गतिविधियों के लिए विदेशी संस्थाओं पर फंडिंग करने का भी आरोप लगाया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अशोक ने दावा किया कि विदेशी ताकतें बेंगलुरु का इस्तेमाल वामपंथी उग्रवाद फैलाने के लिए बेस के तौर पर कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एक अमेरिकी ईसाई संगठन ने बेंगलुरु की दो शेल कंपनियों को 92 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हैं. उन्होंने कहा कि ये बातें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दौरान सामने आई हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद वामपंथी उग्रवादियों और अर्बन नक्सलियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं.
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधते हुए अशोक ने इन कथित गतिविधियों से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां वह काम कर रही हैं जो राज्य के गृह विभाग को करना चाहिए.
अशोक ने पूछा कि भले ही विदेशों से करोड़ों रुपए कथित तौर पर नक्सलियों और आतंकवादियों तक पहुंच रहे हों, लेकिन अगर गृह विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, तो क्या इसका मतलब यह है कि ‘अर्बन नक्सल’ उनके पीछे हैं और उन्हें संरक्षण दे रहे हैं.
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या राज्य सरकार इसलिए नरम रुख अपना रही है क्योंकि इसमें शामिल लोगों और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच कथित संबंध हैं.
अशोक ने ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट’ में केंद्र के प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करने के लिए कांग्रेस की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि ऐसे उपायों का मकसद विदेशी फंड का इस्तेमाल उग्रवादी गतिविधियों के समर्थन में होने से रोकना था.
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आलाकमान ने कर्नाटक को एक एटीएम बना दिया है और अब राज्य को अर्बन नक्सलियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनने दे रही है.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से बात करते हुए अशोक ने कहा कि बेंगलुरु, जिसे राज्य सरकार अपने ब्रांड बेंगलुरु अभियान के तहत बढ़ावा देती है, उग्रवादी गतिविधियों के कारण एक अलग तरह की पहचान बना रहा है.
उन्होंने बेंगलुरु में नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की आलोचना की और मुख्यमंत्री से शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया.
अशोक ने शिवकुमार से स्थिति की जिम्मेदारी लेने को कहा और आरोप लगाया कि सरकार बेंगलुरु को उग्रवाद से जुड़ी गतिविधियों से बचाने में नाकाम रही है.
अशोक ने कांग्रेस सरकार पर किसानों के खिलाफ रवैया अपनाने का भी आरोप लगाया और मांग की कि गदग तालुक को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाए.
अशोक ने कहा कि गदग में बारिश में 49 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और आरोप लगाया कि किसानों को फसल का नुकसान हो रहा है, फिर भी सरकार तालुक को सूखाग्रस्त घोषित करने में नाकाम रही है.
उन्होंने बताया कि पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एचके पाटिल ने चेतावनी दी थी कि अगर 10 अक्टूबर तक गदग तालुक को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया, तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे.
अशोक ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से सूखा घोषित करने और किसानों को मुआवजा देने में हुई देरी पर सवाल उठाए.
उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत गदग और उन सभी अन्य सूखा-प्रभावित तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करे जिन्हें सूची से बाहर रखा गया था. नुकसान झेलने वाले हर किसान के लिए 50,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की भी मांग की.
मुख्यमंत्री से दिखावे की राजनीति के बजाय किसानों की समस्याओं को हल करने पर ध्यान देने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि लोग कांग्रेस सरकार को उसकी कथित किसान-विरोधी नीतियों के लिए जिम्मेदार ठहराएंगे.
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डीकेएम/