कर्नाटक: 28.52 करोड़ रुपये की लागत से क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम शुरू

बेंगलुरु, 4 सितंबर . कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को राज्य में वर्षा की कमी को दूर करने और संभावित जल संकट को रोकने के उद्देश्य से अपना क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम शुरू किया. जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने बेंगलुरु के एचएएल हवाई अड्डे पर विशेष विमान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

मंत्री ने राष्ट्रीय तिरंगा और कर्नाटक ध्वज लहराते हुए क्लाउड सीडिंग अभियान के लिए तैनात विमान का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया और उम्मीद जताई कि यह पहल राज्य में पानी की कमी को दूर करने में सहायक होगी.

लॉन्च के अवसर पर बोलते हुए चेलुवरयास्वामी ने कहा कि कर्नाटक में इस वर्ष कम वर्षा हुई है और चेतावनी दी कि राज्य को आने वाले महीनों में गंभीर सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.

उन्होंने कहा, “मानसून का मौसम इस महीने के अंत तक समाप्त हो जाएगा. अगर तब तक पर्याप्त पानी का भंडारण नहीं किया गया, तो अगले जून के अंत तक गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है. फिलहाल, सूखे की गंभीरता का सटीक आकलन करना मुश्किल है.”

उन्होंने कहा कि सरकार ने संभावित जल संकट को कम करने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए क्लाउड सीडिंग करने का निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा, “पहले किए गए क्लाउड सीडिंग अभियान में लगभग 35 प्रतिशत सफलता मिली थी. चाहे नुकसान हो या फायदा, हमारा एकमात्र उद्देश्य यह है कि कर्नाटक के लोगों को इस परियोजना से लाभ मिले. सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ की हमें कोई चिंता नहीं है. जनता के हितों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है.”

क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है, जिसकी अनुमानित लागत 28.52 करोड़ रुपये है (जीएसटी को छोड़कर).

इस परियोजना का संयुक्त रूप से कार्यान्वयन जल संसाधन विभाग के अंतर्गत कर्नाटक नीरवारी निगम लिमिटेड (केएनएल) और राजस्व विभाग के अंतर्गत कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसडीएमसी) द्वारा किया जा रहा है.

क्लाउड सीडिंग संचालन करने का अनुबंध मेसर्स क्यथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी को दिया गया है, जिसे कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (केटीपीपी) अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई है.

सरकार ने कार्यक्रम के वैज्ञानिक और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए दो अलग-अलग समितियों का गठन किया है.

अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति परियोजना के समग्र कार्यान्वयन और समीक्षा की देखरेख करेगी.

केएसडीएमसी के निदेशक की अध्यक्षता में आठ सदस्यों वाली एक तकनीकी सलाहकार एवं मूल्यांकन समिति, तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगी और संचालन के प्रभाव का आकलन करेगी. समिति को क्लाउड सीडिंग संचालन और उसके प्रभाव के बारे में हर दो घंटे में जानकारी प्राप्त होगी और उसे अपडेट किया जाएगा.

क्लाउड सीडिंग में बारिश को बढ़ावा देने के लिए बादलों में उपयुक्त रसायन डाले जाते हैं.

उपयोग किए जाने वाले रसायन बादलों के प्रकार और तापमान पर निर्भर करते हैं. क्लाउड सीडिंग में सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड, ड्राई आइस और सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है.

तकनीकी टीम डॉप्लर रडार का उपयोग करके बादल घनत्व, हवा की गति और अन्य वायुमंडलीय मापदंडों सहित मौसम की स्थितियों की लगातार निगरानी करेगी.

सरकार ने क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन के लिए पहले से किसी विशिष्ट जिले की पहचान नहीं की है.

इसके बजाय, विमानों को वास्तविक समय के मौसम डेटा और तकनीकी आकलन के आधार पर तैनात किया जाएगा. उपयुक्त बादल दिखाई देने पर वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों, प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों और कृषि संबंधी समस्याओं से जूझ रहे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी.

प्रत्येक ऑपरेशन का स्थान हर दो घंटे में अपडेट होने वाली मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर निर्धारित किया जाएगा, जिससे तकनीकी टीम को उन स्थानों पर विमान तैनात करने की सुविधा मिलेगी जहां बादल संवहन के लिए परिस्थितियां अनुकूल मानी जाती हैं.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जी.सी. चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल, विधायक कोनारेड्डी और अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे.

एसएचके/एएस