
पुणे, 25 जून . पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में एसपी संदीप गिल ने मामले की जांच से जुड़ी अहम जानकारियां गुरुवार को प्रेस वार्ता में दी. उन्होंने कहा कि कपल 31 मई को पुणे के लोनावला स्थित लोहागढ़ किले पर गए थे.
केतन अग्रवाल को ट्रेकिंग का शौक था. उस दिन और अगले कुछ दिनों में दोनों आरोपियों (सिया गोयल और चेतन चौधरी) के मन में यह विचार आया कि केतन को उस जगह से नीचे धकेला जा सकता है. उन्होंने अपने इस विचार को लेकर सोचना शुरू किया.
एसपी ने बताया कि फिर 4 बजे, उन्होंने किले पर वापस जाने की योजना बनाई. हालांकि, उस दिन ऐसा संभव नहीं हो पाया. फिर, उस घटना को अंजाम देने के लिए 14 जून को उसी जगह को चुना गया. उसी पॉइंट पर, जहां से 18 जून को गिरकर केतन की मौत हुई थी.
मामले की ज्यादातर जांच में यह पाया गया है कि 14 जून को भी यह कोशिश की गई थी. वह कोशिश सफल नहीं हुई और मृतक केतन अग्रवाल के मन में इसका कोई शक भी पैदा नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि दोनों आरोपियों से पूछताछ से जुड़ी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है. पुलिस जांच कर रही है और जरूरी सबूत जुटा रही है. हम आगे भी इस घटना को लेकर प्रेस को जानकारी देते रहेंगे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिया और चेतन ने पिछले छह महीने में एक-दूसरे को 2,004 बार फोन किया और कुल 238 घंटे बातचीत की. दोनों के बीच फोन पर कई बार दो-तीन घंटे से ज्यादा समय तक भी बातचीत हुई. पुलिस को शक है कि सिया और चेतन के बीच इतनी ज्यादा बातचीत का संबंध केतन की हत्या की साजिश से हो सकता है.
पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि घटना वाले दिन सिया और चेतन लोहागढ़ किला जाने से पहले एक कैफे में मिले थे और उन्होंने केतन को खत्म करने की साजिश को अंतिम रूप दिया था. मुलाकात के दौरान दोनों ने किले की एक ऐसी उपयुक्त जगह की पहचान की, जहां से केतन को खाई में धकेला जा सके. उन्होंने हत्या की साजिश को अंजाम देने की पूरी तैयारी भी की.
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डीके/एबीएम