हॉस्टल मेस में नॉनवेज खाना बनाने और परोसने पर केजीएमयू ने लगाई रोक, संतों ने फैसले का किया स्वागत

लखनऊ, 15 जुलाई . किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) ने सभी हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज खाना बनाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है. जिसको लेकर बुधवार को साधु-संतों ने विश्वविद्यालय के इस फैसले का स्वागत किया है. यह कदम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के हालिया कैंपस निरीक्षण के बाद उठाया गया है.

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब हॉस्टल मेस और कैंटीन में नॉनवेज खाना न तो तैयार किया जाएगा और न ही परोसा जाएगा लेकिन छात्रों को अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार बाहर से ऐसा भोजन मंगाने या खुद पकाने की स्वतंत्रता बनी रहेगी.

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा कैंपस दौरे के दौरान उन स्थानों पर स्वच्छता मानकों को लेकर चिंता जताए जाने के बाद लिया गया, जहां नॉन-वेज भोजन तैयार किया जा रहा था.

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज ने इसका स्वागत किया और उम्मीद जताई कि देशभर के अन्य शिक्षण संस्थान भी इसी तरह के कदम उठाएंगे. संत सतेंद्र दास वेदांत महाराज ने से बात करते हुए कहा, “मैं राज्यपाल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं. मुझे उम्मीद है कि यह निर्णय केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में लागू किया जाएगा. जहां भी हॉस्टल संचालित हो रहे हैं, वहां इस तरह का प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “छात्रों को नॉनवेज भोजन परोसने और इस तरह की खानपान की आदतों को बढ़ावा देने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए. यह केवल लखनऊ तक सीमित नहीं होना चाहिए; बल्कि भारत के सभी हॉस्टल, शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में इस तरह का प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए.”

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने भी विश्वविद्यालय के फैसले की सराहना की. उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि नॉन-वेज भोजन करने से जरूरी नहीं कि स्वास्थ्य बेहतर हो या शारीरिक ताकत बढ़े.

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने से बात करते हुए कहा, “यह बहुत अच्छा निर्णय है कि लखनऊ स्थित केजीएमयू में नॉन-वेज खाना नहीं बनाया जाएगा. यह सराहनीय है क्योंकि नॉन-वेज भोजन करने से स्वास्थ्य बेहतर नहीं होता और न ही ताकत मिलती है. यह केवल कई लोगों की आदत बन गई है.”

उन्होंने कहा, “इसलिए केजीएमयू में नॉन-वेज भोजन न तो पकाया जाएगा और न ही परोसा जाएगा, यह एक सकारात्मक कदम है. सभी को समझना चाहिए कि नॉन-वेज भोजन करने से व्यक्ति अधिक स्वस्थ या मजबूत नहीं बनता.”

रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने भी से बातचीत में विश्वविद्यालय के इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इससे दुर्गंध से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहायता मिलेगी.

उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छा निर्णय है. सबसे पहले, इससे दुर्गंध की समस्या से राहत मिलेगी, क्योंकि नॉन-वेज खाना पकाने से अप्रिय गंध पैदा होती है. दूसरा, यह कुछ अप्रत्याशित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पर्यावरण को बचाने में मदद करेगा. हम इस निर्णय लेने वालों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं. यह एक स्वागत योग्य और ऐतिहासिक फैसला है. हालांकि यह देर से आया है, लेकिन यह एक साहसिक कदम है.”

एसएके/पीएम