
कोलकाता, 2 नवंबर . तृणमूल कांग्रेस के नेता और विधायक कुणाल घोष ने भाजपा की ‘गणतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रैली पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता कोलकाता में रैली के जरिए घबराहट में ऐसा कदम उठा रहे हैं, जिससे पार्टी खुद ही राजनीतिक नुकसान कर रही है. इसके अलावा, घोष ने नंदन में नेमप्लेट हटाने के मुद्दे, चोरबागान मामले और बाबरी मस्जिद से जुड़े विवाद पर भी भाजपा को घेरा.
कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा ‘सेव डेमोक्रेसी’ का नारा देकर खुद यह स्वीकार कर रही है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है. लोकतंत्र बचाने का नारा तो विपक्ष का होना चाहिए, क्योंकि चुनाव के बाद से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. देश में वोट चोरी को लेकर लोग जागरूक हो चुके हैं और बंगाल में भी वास्तविक मतदाताओं को बाहर रखकर केंद्रीय बलों का दुरुपयोग किया गया. घोष ने कहा कि रामलीला मैदान में पूरा विपक्ष एकजुट होकर खड़ा था और उसके बाद भाजपा दबाव में ‘सेव डेमोक्रेसी’ का नारा लेकर सड़क पर उतर आई. उन्होंने इसे भाजपा की घबराहट और राजनीतिक ‘सेल्फ गोल’ बताया.
चोरबागान मामले का जिक्र करते हुए कुणाल घोष ने कहा कि घटना के दिन तीनों राजनीतिक दलों ने एक ही समय पर गिरिश पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान फुटपाथ और सड़कें खाली थीं और आम लोगों के आने-जाने में कोई बाधा नहीं थी. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थकों के साथ सीपीएम और कांग्रेस के लोग भी मौजूद थे. इसके बावजूद एफआईआर केवल तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ दर्ज की गई. घोष ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया.
बाबरी मस्जिद से जुड़े मुद्दे पर घोष ने कहा कि भाजपा द्वारा बाबरी मस्जिद गिराए जाने के खिलाफ उनकी पार्टी लगातार विरोध करती रही है. हुमायूं वर्ष 2019 में भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार भी रह चुके हैं. कुछ लोग बाबरी मस्जिद के मुद्दे का योजनाबद्ध तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजनीतिक प्रभाव पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद से भाजपा को राजनीतिक फायदा मिल रहा है. घोष ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके पीछे के घटनाक्रम को समझने की जरूरत है.
कोलकाता के सांस्कृतिक केंद्र नंदन को लेकर कुणाल घोष ने कहा कि इसकी स्थापना ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के समय हुई थी. बाद में ममता बनर्जी ने इसका नवीनीकरण कराया. उन्होंने कहा कि नंदन के इतिहास और इसके निर्माण में अलग-अलग सरकारों की भूमिका सभी जानते हैं. नंदन में नेमप्लेट को चुनिंदा तरीके से हटाने की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है. नंदन की स्थापना का श्रेय ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य को जाता है और भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है.
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पीएसके