भारत में ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ सेवा की शुरुआत, दिनेश शर्मा ने कहा-विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़े कदम

नई दिल्ली, 2 मई . भारत ने शनिवार को स्वदेशी तकनीक के माध्यम से ‘सेल ब्रॉडकास्ट’ सेवा की शुरुआत करते हुए देशव्यापी मोबाइल-आधारित आपदा संचार प्रणाली की दिशा में एक अहम कदम बढ़ाया. इस पहल के तहत टेस्ट अलर्ट भी जारी किया गया, जिससे आपात स्थितियों में लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाने की क्षमता को परखा गया. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि यह भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ते कदम का प्रतीक है.

दिनेश शर्मा ने कहा कि पहले लोगों को सचेत करने के लिए सायरन जैसी पारंपरिक प्रणालियों का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब मोबाइल आधारित अलर्ट सिस्टम ने इसे अधिक प्रभावी और तेज बना दिया है. उन्होंने इसे ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब सूचनाएं सीधे लोगों के मोबाइल फोन पर पहुंच रही हैं, जिससे आपदा प्रबंधन और भी सशक्त होगा.

वहीं, कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक विकास बताया. उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक के उपयोग से विकसित यह प्रणाली देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे आपदा के समय बेहतर संचार संभव हो सकेगा.

इस विषय पर साइबर विशेषज्ञ अंकुर पुराणिक ने बताया कि इस प्रणाली को ‘सेलुलर ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ कहा जाता है, जिसका उपयोग पहले से कई देशों में किया जा रहा है. उन्होंने जानकारी दी कि इसे सी-डॉट ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ मिलकर विकसित किया है, जिसमें दूरसंचार विभाग की भी भागीदारी है. यह सिस्टम मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के जरिए काम करता है, जिससे अलर्ट तेजी से व्यापक स्तर पर पहुंचाया जा सकता है.

अंकुर पुराणिक ने यह भी कहा कि हालांकि तकनीकी रूप से कुछ मामलों में नकली अलर्ट की नकल संभव हो सकती है, लेकिन यह सीमित स्तर पर ही हो पाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि थर्ड-पार्टी ऐप्स के जरिए नकली अलर्ट संदेश बनाए जा सकते हैं, लेकिन यह अलग मुद्दा है और इससे निपटने के लिए अलग सुरक्षा उपाय किए जाएंगे.

मुंबई और वडोदरा सहित कई शहरों में टेस्ट अलर्ट मिलने के बाद लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं. कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने इसे एक अच्छी पहल बताते हुए कहा कि इस तरह के अलर्ट से लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सकता है. वहीं, साइबर विशेषज्ञ मयूर भुसावलकर ने कहा कि भूकंप या सुनामी जैसी आपदाओं के दौरान किसी विशेष क्षेत्र के लोगों को तुरंत सूचना देने में यह प्रणाली बेहद कारगर साबित होगी.

एएसएच/पीएम