
नई दिल्ली, 16 जून . पश्चिम बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बगावत की लहर तेज हो गई है. पार्टी की लोकसभा सदस्यों में से 20 सांसदों ने अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय कर लिया है. दावा किया जा रहा कि बागी गुटों के सांसदों की संख्या में इजाफा हो सकता है. इसी बीच, टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ कहा कि उन्होंने टीएमसी को कोई धोखा नहीं दिया है. उन्होंने दावा किया कि दो-तिहाई सांसदों के अलग होने की स्थिति का संविधान में भी जिक्र है.
मीडिया से बातचीत के दौरान सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि हम 20 लोकसभा सांसद हैं. अगर सांसद अलग हो रहे हैं, तो यह धोखा नहीं कहा जाएगा. देश का संविधान इसकी इजाजत देता है. लोकसभा भी इसकी इजाजत देती है. अगर संख्या दो-तिहाई से कम होती, तो यह धोखा माना जाता.
दरअसल अगर किसी राजनीतिक दल के लोकसभा में मौजूद कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होकर किसी दूसरे दल में शामिल होने या विलय का फैसला करते हैं, तो उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जाता.
बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि मैंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन की थी. मैंने छोड़ने से पहले कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया था. उसके बाद ही मैं टीएमसी में शामिल हुआ. ‘असली टीएमसी’ के सवाल पर उन्होंने कहा कि कौन असली है, इसका फैसला कोर्ट करेगा.
सांसद ने महाराष्ट्र के शिवसेना विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि अदालत ने तय किया था कि असली शिवसेना कौन है. कोर्ट के फैसले के बाद असली शिवसेना कौन थी, सभी को पता चला.
सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि लोकसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. सत्र शुरू होने से पहले अगले कदम उठाए जाएंगे.
टीएमसी सांसद ने कहा कि मेरे लिए नियमित रूप से दिल्ली आना-जाना संभव नहीं है. इस बात पर चर्चा हो रही है कि दोनों पक्ष कैसे साथ बैठेंगे, करीब आएंगे और समूह के लिए भविष्य की कार्ययोजना तय करेंगे.
टीएमसी के प्रतीक, संपत्ति और अन्य संगठनात्मक मामलों पर सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर निर्णय लेने होंगे. अनुभव बताता है कि इनमें से कई मामले अंततः अदालत में सुलझाए जाएंगे. लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी में संसदीय गुट को मान्यता देना, उसका गठन करना और पार्टी कार्यालय के लिए जगह आवंटित करना शामिल है.
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डीकेएम/वीसी