
बेंगलुरु, 7 अगस्त . कर्नाटक विधान परिषद के सभापति पद को लेकर राजनीतिक ड्रामा शुक्रवार को भी जारी रहा. इस बीच, कांग्रेस सरकार परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है.
होरट्टी ने शुक्रवार को सदाशिवनगर स्थित आवास पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की. हालांकि होरट्टी ने पहले घोषणा की थी कि वह 14 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन अब पता चला है कि उन्होंने पद छोड़ने से पहले और समय मांगा है.
बातचीत के बाद होरट्टी मुख्यमंत्री आवास से साफ तौर पर नाराज दिखते हुए निकले.
मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद सवालों का जवाब देते हुए होराट्टी ने कहा कि वह अपने पहले के रुख पर कायम हैं. बेंगलुरु में मुख्यमंत्री आवास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए होराट्टी ने कहा, “मैंने जो कुछ दिन पहले कहा था, मैं उस पर कायम हूं. अगर वे अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं, तो ला सकते हैं. वे कानून के मुताबिक आगे बढ़ सकते हैं.”
खबरों के अनुसार, होरट्टी के अपने इस्तीफे पर साफ तौर पर कोई वादा न करने के कारण कांग्रेस ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है.
सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी पार्टी को इस बात की चिंता है कि होरट्टी ने चेयरमैन के तौर पर अहम फैसले लेने से पहले भाजपा नेताओं से सलाह-मशविरा करके पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है.
खबरों के मुताबिक, कांग्रेस एमएलसी इवान डिसूजा अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस तैयार कर रहे हैं, जिसे विधान परिषद में पेश किए जाने की उम्मीद है. कांग्रेस पार्टी ने नए मंत्रियों की सूची जारी करते हुए वरिष्ठ नेता सलीम अहमद को इस पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इस कदम से विवाद खड़ा हो गया है.
भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि जब काउंसिल चेयरमैन का पद पहले से ही भरा हुआ हो, तो उस पद के लिए किसी उम्मीदवार की घोषणा करना परंपरा के खिलाफ है. पार्टी का कहना था कि चेयरमैन का पद संवैधानिक महत्व रखता है और पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर इसका सम्मान किया जाना चाहिए.
केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने गुरुवार को होराट्टी से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की और चर्चा की. इन घटनाक्रमों पर नाराजगी जाहिर करते हुए होराट्टी ने कहा था कि संवैधानिक पद की गरिमा को इस तरह कमजोर करना अनुचित है.
उन्होंने कहा, “किसी संवैधानिक पद का अनादर करना या उस पर कब्जा करना सही नहीं है. मुख्यमंत्री ने मुझसे कहा कि हाईकमान का आदेश है और इसलिए मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए. सिद्दारमैया ने मुझसे यह भी कहा कि वह इस मामले पर किसी से बात नहीं करेंगे.”
होराट्टी ने कहा कि चेयरमैन पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे एक आम सदस्य के तौर पर लेजिस्लेटिव काउंसिल की कार्यवाही में हिस्सा लेते रहेंगे. उन्होंने कहा, “मुझ पर भरोसा न जताने वाली बातों से मुझे बहुत दुख पहुंचा है. मैं ऐसे माहौल में काम जारी नहीं रखना चाहता और इसीलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है.”
–
एसएचके/वीसी