
नासिक, 12 जुलाई . लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को महाराष्ट्र के नासिक जिले स्थित भगवान शिव के पवित्र त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की. इस दौरान उन्होंने विधिवत पूजन और आरती में भाग लेकर देश की प्रगति, समृद्धि, शांति और नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की. मंदिर प्रशासन ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया.
मंदिर प्रशासन के अनुसार दर्शन के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और त्र्यंबकेश्वर मंदिर संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे. इस अवसर पर त्र्यंबक नगर परिषद की नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार, निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत, सहायक जिलाधिकारी डॉ. पवन दत्ता, प्रशिक्षु जिलाधिकारी डॉ. जयकुमार आढे, तहसीलदार गणेश जाधव, पुलिस निरीक्षक प्रीतम चौधरी, मंदिर संस्थान के विश्वस्त कैलास घुले और रुपाली भुतड़ा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे. त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे भी इस मौके पर मौजूद रहे.
त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तीर्थराज कुशावर्त में भी विधिवत पूजा-अर्चना की. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुशावर्त कुंड को गोदावरी नदी का उद्गम स्थल माना जाता है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है.
दर्शन के बाद ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव साझा किया. उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्हें महाराष्ट्र के नासिक में स्थित भगवान शिव के आठवें ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना का सौभाग्य प्राप्त हुआ.
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भगवान त्र्यंबकेश्वर के श्रीचरणों में उन्होंने देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड कल्याण के लिए प्रार्थना की. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवान शिव की कृपा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण की भावना को निरंतर सशक्त बनाती रहेगी तथा राष्ट्र विकास, सामाजिक समरसता और प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा.
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सावन मास और अन्य धार्मिक अवसरों पर इस मंदिर का विशेष महत्व रहता है. लोकसभा अध्यक्ष के इस दौरे को लेकर मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जबकि दर्शन और पूजा की सभी व्यवस्थाएं मंदिर प्रशासन की देखरेख में संपन्न हुईं.
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एससीएच/वीसी