मध्य प्रदेश: जादू-टोने के लिए भालू का शिकार, 4 लोगों को 3 साल की सख्त सजा

भोपाल/बैतूल, 19 अगस्त (आईएएएस). मध्य प्रदेश के बैतूल की एक अदालत ने बुधवार को चार लोगों को भालू के शिकार के मामले में तीन साल की कठोर कैद (आरआई) और हर एक पर 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया. यह मामला आठ साल पहले फॉरेस्ट रेंज सारनी (जनरल) ने दर्ज किया था.

एक सह-आरोपी अभी भी फरार है, इसलिए उसके खिलाफ अदालत ने कोई फैसला नहीं सुनाया है.

वन अधिकारियों के मुताबिक, दोषी ठहराए गए लोगों में प्रीतिश, रमेन उर्फ ​​चंकी, राहुल (तीनों बटकीडोह के रहने वाले) और निश्चिंतपुर गांव का वासु शामिल हैं.

सरकारी वकील अजीत सिंह और अभयदीप सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार का पक्ष रखा.

14 दिसंबर 2018 को, फॉरेस्ट रेंज सारनी (जनरल) के तहत हीरापुर बीट के कंपार्टमेंट में सीमा रेखा के पास एक नाले में एक मृत भालू मिला था.

जानवर का दाहिना पंजा कटा हुआ था और दूसरे पंजे के नाखून गायब थे.

शुरुआती सबूतों से शिकार का संकेत मिला.

वन विभाग ने अज्ञात लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया.

बाद में जांचकर्ताओं को सूचना मिली और उन्होंने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस पूछताछ के दौरान, चारों आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया.

उन्होंने जंगल के नाले में एक खूंटी और गैल्वेनाइज्ड लोहे का तार लगाने और जंगली जानवर को मारने के इरादे से उसमें बिजली का करंट दौड़ाने की बात कबूल की.

करंट लगने से भालू की मौत हो गई.

इसके बाद आरोपियों ने एक पंजा काट दिया और दूसरे पंजे से नाखून निकाल लिए, ताकि उनका इस्तेमाल जादू-टोने में किया जा सके.

अपराध साबित होने के बाद, अदालत में औपचारिक शिकायत दर्ज की गई.

ट्रायल के दौरान पेश किए गए सबूतों की जांच के बाद, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास सुरेश यादव की अदालत ने चार लोगों को भालू का शिकार करने और उसके शरीर के अंग अपने पास रखने का दोषी ठहराया.

अदालत ने उनमें से हर एक को तीन साल की कड़ी कैद और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई.

सह-आरोपी कालू उर्फ सुभाष (पिता: खिरत बढ़ई, निवासी: नूतनडांगा गांव) के खिलाफ कोई फैसला नहीं सुनाया गया, क्योंकि वह अभी भी फरार है.

वन विभाग ने अपराध के फरार आरोपी को पकड़कर सजा दिलाने की कोशिशें तेज कर दी हैं.

एमएस/