
मुंबई, 23 अक्टूबर . महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट में अनियमितता और नियम बदलने को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा और कहा कि उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला चलना चाहिए.
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, “इंडिया गठबंधन के साथ बैठक चल रही है और निरंतर सरकार को घेरने का जो प्रयास चल रहा है, उसमें हम साझेदारी से भी लोग कोशिश करते हैं. चुनाव आयोग का मूल जो आपत्ति है, पिछले ही समय में उन्होंने जो अनियमितता की है, उसको लेकर ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए. हम पूछना चाहते हैं कि नियम क्यों बदले गए? इसको लेकर भी स्पष्टता करनी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, किसी निजी कंपनी को वोटर लिस्ट का पूरा एक्सेस देते हुए उनका नियंत्रण बढ़ाना और यह सारा डेटा विदेशियों के हाथों में देना, इसको लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के तहत मामला चलाया जाना चाहिए. खरीद-फरोख्त बहुत दिनों से शुरू हो गई थी. “पैसा फेंको, तमाशा देखो” सत्ताधीशों का यह अहंकार है, लेकिन उनको करारा जवाब वोटर देंगे.
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की Supreme Court की कार्रवाई को लेकर सरकार जो है, वह बेशर्म बनी हुई है, मूकदर्शक बनी हुई है. यह बहुत ही निंदनीय है. यदि आज एक लाख रुपए देने और संपूर्ण ऋणमाफी का सरकार ऐलान करे, तब भी जनता सब समझती है.
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सभी जगहों पर महाविकास आघाड़ी और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है. हमें उम्मीद है कि हमारा प्रदर्शन बहुत अच्छा रहेगा और हम बड़ी संख्या में सीटें जीतेंगे. पूरे महाराष्ट्र में हमारा अच्छा प्रदर्शन होगा.
प्रधानमंत्री मोदी के ‘भारत को मिट्टी में मिलाने की कोशिश’ वाले बयान पर उन्होंने कहा कि पीएम मोदी पहले अपने उन वादों का हिसाब दें जो उन्होंने 12 साल पहले किए थे. उनमें से कितने पूरे किए? वादे पूरे न कर पाने और झूठ बोलने को लेकर उन्हें जनता को जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है और हर जगह विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है.
हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि एसआईआर को लेकर जनआंदोलन हो चुका है. ‘ऑफ द पीपल, बाय द पीपल, फॉर द पीपल’ और ‘वन मैन, वन वोट, वन वैल्यू’ की जो लड़ाई है, उसे आगे भी लड़ना होगा.
सोनिया गांधी की पुस्तक को लेकर उन्होंने कहा कि वह हमारी नेता हैं. उन पर बार-बार जो निराधार और घिनौने आरोप लगाए गए, उनके बावजूद उन्होंने भारत की बहू के रूप में, राजीव गांधी की विधवा के रूप में, देश में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. देश की प्रगति और विकास के लिए उन्होंने हमेशा आवाज उठाई.
उन्होंने कहा कि जब 2004 में कांग्रेस को बहुमत मिला, तब उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर प्रधानमंत्री पद तक ठुकरा दिया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पूरे परिवार ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है. उनके जीवन का सफर, उनके अपने शब्दों में लोगों के सामने आएगा. इंदिरा गांधी की किताब हो या अन्य नेताओं की आत्मकथाएं, उसी परंपरा में यह भी एक प्रेरणादायक पुस्तक होगी.
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केके/वीसी