
पटना, 17 सितंबर . कभी कोचिंग में शिक्षक के तौर पर काम कर परिवार की जरूरतें पूरी करने की जद्दोजहद करने वाले पटना के मनोज कुमार शर्मा आज अपना कारोबार चला रहे हैं और करीब 25 लोगों को रोजगार दे रहे हैं. कंकड़बाग निवासी मनोज शर्मा की यह यात्रा नौकरी की तलाश से शुरू होकर उद्यमिता तक कैसे पहुंची, इसका श्रेय वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) से मिले सहयोग को देते हैं.
ग्रेजुएशन के बाद मनोज शर्मा के सामने रोजगार की चुनौती थी. उन्होंने जीवनयापन के लिए कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया, लेकिन इससे परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था. इसके बाद वह रोजगार की तलाश में कोलकाता चले गए, जहां उन्होंने मेडिकल फर्नीचर बनाने वाली कंपनी में काम किया. कुछ वर्षों तक इस क्षेत्र में काम करने के बाद मनोज को लगा कि जिस तरह का काम वह कोलकाता में कर रहे हैं, वैसा कारोबार बिहार में भी शुरू किया जा सकता है.
इसके बाद वह पटना लौटे और कैटरपिलर सॉल्यूशन नाम से मेडिकल फर्नीचर निर्माण की इकाई शुरू की. कारोबार शुरू करने के बाद मनोज का लक्ष्य केवल छोटी यूनिट चलाना नहीं था, बल्कि इसे बड़े उद्यम के रूप में विकसित करना था. इसके लिए सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी. इसी दौरान उन्होंने पीएमईजीपी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया.
उन्होंने बताया कि योजना से जुड़े प्रयासों और केवीआईसी के सहयोग ने उनकी परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद की. मनोज शर्मा ने को बताया कि उनकी फैक्ट्री में फिलहाल करीब 25 लोग काम कर रहे हैं. उनके मेडिकल फर्नीचर उत्पाद बिहार के बाहर भी बिक्री के लिए भेजे जाते हैं. उन्होंने बताया कि वर्तमान में कंपनी का टर्नओवर करीब पौने दो करोड़ रुपए सालाना है और अगले साल इसे बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
उन्होंने बताया कि कारोबार शुरू करने के दौरान उन्हें कई परेशानियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन योजना से जुड़े संस्थानों और केवीआईसी टीम से मिले सहयोग ने उनका मनोबल बढ़ाया. आज वह आत्मनिर्भर हैं और इसके लिए प्रधानमंत्री तथा केवीआईसी टीम के आभारी हैं. प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु होने की कामना करते हुए दीपोत्सव मनाएंगे.
उन्होंने प्रधानमंत्री से युवाओं के लिए इसी तरह की योजनाएं जारी रखने की अपील की. मनोज शर्मा की फैक्ट्री में काम करने वाले कमलेश विश्वकर्मा के लिए भी स्थानीय रोजगार का मतलब परिवार के साथ रहने का अवसर है. उन्होंने बताया कि पहले वह दिल्ली में काम करने जाते थे, लेकिन वहां की कमाई और खर्च के बीच परिवार चलाना मुश्किल होता था. बाद में उन्हें पटना में मनोज की फैक्ट्री में काम मिलने की जानकारी मिली. अब उन्हें काम के लिए बिहार से बाहर नहीं जाना पड़ता. वह रोज घर से फैक्ट्री आते हैं और शाम को परिवार के पास लौट जाते हैं.
स्थानीय रोजगार मिलने से परिवार के साथ रहने और बच्चों की देखभाल करने में आसानी हुई है. फैक्ट्री में काम करने वाले सुदामा कुमार ने भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ऐसी और फैक्ट्रियां खुलनी चाहिए, ताकि बिहार के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े. स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से परिवार साथ रहता है और लोगों को बाहर जाकर रहने की मजबूरी कम होती है.
सुदामा ने बताया कि वह पहले गुजरात में करीब छह महीने काम कर चुके हैं, लेकिन वहां मिलने वाली आय उनके लिए पर्याप्त नहीं थी. वापस बिहार आने के बाद उन्हें मनोज शर्मा की फैक्ट्री में काम मिला. यहां काम और वेतन दोनों संतोषजनक हैं और वह चाहते हैं कि दूसरे लोग भी स्थानीय स्तर पर रोजगार हासिल करें. फैक्ट्री में काम करने वाले गौतम कुमार ने बताया कि वह पहले दिल्ली में काम करते थे. वहां कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था और परिवार से दूर रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जीवन भी प्रभावित होता था.
बाद में उन्हें पटना में नई फैक्ट्री में रोजगार मिलने की जानकारी मिली और उन्होंने यहां काम शुरू कर दिया. गौतम ने बताया कि अब वह रोज काम के लिए फैक्ट्री आते हैं और शाम को घर लौट जाते हैं. इससे वह नौकरी के साथ खेती-बारी भी कर पाते हैं और परिवार के साथ समय बिता पाते हैं. बिहार में ऐसी और फैक्ट्रियां खुलें तो बाहर जाने वाले कई लोगों को अपने घर के आसपास ही रोजगार मिल सकता है.
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पीएसके/वीसी