
नई दिल्ली, 23 सितंबर . दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मैक्स हॉस्पिटल रोड के चौड़ीकरण के लिए प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण कार्रवाई के बाद राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया लगातार सामने आ रही हैं. इस दौरान मदीना मस्जिद के अवैध विस्तार और आसपास के अवैध निर्माणों को हटाया गया था. इस कार्रवाई को लेकर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने दिल्ली सरकार और प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं.
मौलाना रशीदी ने से बात करते हुए कहा कि यदि कोई निर्माण अवैध है तो उसे रात के अंधेरे में क्यों गिराया जाता है. उन्होंने सहारनपुर की कलेक्टोरेट मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी प्रशासन ने सील करने की बात कहकर रात में करीब तीन-चार बजे मस्जिद को गिरा दिया था, जबकि उसके ध्वस्तीकरण का कोई आदेश नहीं था. शालीमार बाग की मस्जिद के मामले में भी ऐसा ही हुआ है.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन के पास ध्वस्तीकरण के वैध आदेश हैं तो दिन के उजाले में कार्रवाई करने में क्या आपत्ति है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई जानबूझकर की जाती है ताकि हिंदू और मुसलमानों के बीच नफरत बढ़े. इससे हिंदुओं के एक वर्ग में यह भावना पैदा करने की कोशिश की जाती है कि मुसलमानों पर कार्रवाई हो रही है.
मौलाना रशीदी ने कहा कि समाज में एक ऐसा वर्ग है जो नहीं चाहता कि मुसलमान देश में खुशी से रहें और अपने धर्म का पालन स्वतंत्रता के साथ करें. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर ने बनाया है, सभी धर्मों को समान अधिकार देता है. संविधान के अनुसार हर हिंदू, मुसलमान, ईसाई और सिख को अपने धर्म का पालन करने की पूरी स्वतंत्रता है. एक हिंदू को जितने अधिकार प्राप्त हैं, उतने ही अधिकार एक मुसलमान को भी प्राप्त हैं, इसमें कोई भेदभाव नहीं है. कुछ लोगों के मन में इस्लाम को लेकर भय और मुसलमानों के प्रति नफरत है, इसलिए वे ऐसी सोच रखते हैं.
एआईएमआईएम के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई द्वारा इस कार्रवाई को ‘सहारनपुर पार्ट-2’ बताए जाने पर मौलाना रशीदी ने कहा कि यह पार्ट-2 का मामला नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि यदि मस्जिद का निर्माण अवैध था तो वह रातों-रात तो नहीं बनी. कोई भी मस्जिद एक दिन में खड़ी नहीं होती.
उन्होंने कहा कि दिल्ली में मौजूदा सरकार 2024 में बनी थी और अब 2026 चल रहा है. पिछले डेढ़ से दो साल में सरकार को देखना चाहिए था कि कहां गलत निर्माण हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कई वैध बाजारों को भी गिरा दिया और लोगों को बेरोजगार कर सड़क पर ला खड़ा किया, और अब मुसलमानों के धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई शुरू कर दी है.
मौलाना रशीदी ने दावा किया कि दिल्ली में 1070 ऐसे मंदिर हैं जो अवैध निर्माण की श्रेणी में आते हैं और सड़कों व सरकारी जमीन पर बने हुए हैं. इस संबंध में एक आरटीआई दायर की गई थी, जिसके जवाब में यह जानकारी सामने आई थी, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने सवाल उठाया कि यह हिंदू-मुसलमान का खेल कब तक चलेगा.
उन्होंने कहा कि मुसलमान अभी शांत है, उसे जगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. यदि मुसलमान जाग गया तो सरकार के लिए सरकार चलाना मुश्किल हो जाएगा.
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘अपराधियों की कोई जाति नहीं होती’, मौलाना रशीदी ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि अपराधी की कोई जाति नहीं होती तो जमुई कांड के आरोपी का फुल एनकाउंटर क्यों नहीं हुआ, सिर्फ हाफ एनकाउंटर क्यों किया गया और अन्य को अभी तक पकड़ा क्यों नहीं गया. सरकार की पकड़ से कोई अपराधी कैसे बच सकता है.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह जानबूझकर किया जा रहा है. यदि आरोपी कोई अब्दुल या कोई मुसलमान होता तो उसका फुल एनकाउंटर कर दिया जाता. सरकारें जाति, धर्म और नाम देखकर कार्रवाई कर रही हैं. उन्होंने कहा कि वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता, दिन पलटते रहते हैं. जब वक्त बदलेगा तब जो लोग आज इस तरह की कार्रवाई कर रहे हैं, उनके साथ भी वैसी ही कार्रवाई होगी.
आजमगढ़ हत्याकांड के मामले पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि आरोपी कोई भी हो, उसके साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए. लेकिन जहां सरकारें धर्म, जाति और नाम देखकर कार्रवाई करती हैं, वहां सरकार की नीयत पर सवाल उठाना जरूरी हो जाता है.
उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई ऐसे मामले हैं जहां नाम देखकर कार्रवाई की गई. खोड़ा में एक ही दिन में चार वारदातें हुईं, जिसमें एक आरोपी मुसलमान था और उसे मार दिया गया, जबकि तीन अन्य आरोपी हिंदू थे और उन्हें नहीं मारा गया. उन्होंने इसे सरकार की दोहरी नीति और दोहरी राजनीति बताया.
उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि नेता संविधान की शपथ लेते हैं और धर्मनिरपेक्ष रहने तथा किसी के साथ पक्षपात न करने की बात कहते हैं, लेकिन व्यवहार में खुला पक्षपात हो रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हैं और मौलानाओं का नाम लेकर टिप्पणी करते हैं. एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए.
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पीआईएम/एएस