
बरेली, 16 अगस्त . ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यूसीसी लागू करने, पश्चिम बंगाल में मदरसों की जांच और पाकिस्तान के कश्मीर वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सरकारें एकतरफा फैसले लेकर देश के एक समुदाय को निशाना बना रही हैं.
मौलाना ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के यूसीसी को लेकर किए गए ऐलान पर कहा, “मोहन यादव सरकार कई महीनों से यूसीसी पर विचार कर रही थी. अब इस बिल को पास करके कानून बना दिया गया है. यूसीसी भाजपा के एजेंडे में शामिल है. इससे पहले भी भाजपा शासित कई राज्यों में यूसीसी लागू हो चुका है. चाहे वह उत्तराखंड, गुजरात हो या असम.”
उन्होंने सवाल उठाया कि यूसीसी से आदिवासियों को अलग क्यों रखा गया है. क्या यह भारत के नागरिक नहीं हैं? क्या यूसीसी सिर्फ मुसलमानों को चिढ़ाने के लिए लागू किया जा रहा है? सिर्फ मुसलमान ही निशाने पर क्यों हैं?”
मौलाना ने कहा, “संविधान में यह प्रावधान है कि यूसीसी लागू करने से पहले सभी समुदायों और संप्रदायों से चर्चा की जाए और सहमति बनने के बाद ही इसे लागू किया जाए, लेकिन यह एकतरफा लागू किया जा रहा है. मुसलमानों से कोई सलाह नहीं ली गई है. अगर लागू किया गया है तो आदिवासी अलग क्यों रखे गए हैं? इन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए. देश में दो पैमाने नहीं रखे जा सकते हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने संविधान के खिलाफ यूसीसी को लागू किया है. यूसीसी को मानने के लिए मुसलमान बाध्य नहीं हैं.”
पश्चिम बंगाल में मदरसों की विदेशी फंडिंग को लेकर पुलिस की पूछताछ पर मौलाना ने कहा, “सरकार जांच करे, उन्हें कोई एतराज नहीं है. बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार जब से बनी है, वह तानाशाही कर रही है. सरकार ने मदरसों की टेरर फंडिंग को लेकर एक नया विवाद शुरू किया है. सरकार जैसे चाहे, मदरसों की जांच करे. मदरसे खुली हुई किताब हैं, जिसमें छिपाने के लिए कुछ नहीं है.”
उन्होंने कहा, “जांच में पारदर्शिता होनी चाहिए और यह देशहित में होनी चाहिए, लेकिन सरकार मदरसों को निशाने पर ले रही है. मदरसों से जो बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, सरकार उसे किसी तरह से रोकना चाहती है. यह गैरकानूनी है, लेकिन आवाम इसे ज्यादा दिन तक बर्दाश्त नहीं करेगी.”
पाकिस्तान द्वारा संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से कश्मीर का मुद्दा उठाने पर मौलाना ने साफ कहा, “भारत किसी तीसरे पक्ष के दखल को बर्दाश्त नहीं करेगा. पाकिस्तान यूएनओ के माध्यम से कश्मीर का मुद्दा हल किए जाने की जो बातें कह रहा है, हम उन्हें स्पष्ट करना चाहते हैं कि भारत कश्मीर के मामले में किसी तीसरे के दखल को बर्दाश्त नहीं कर सकता. हमें किसी की मध्यस्थता और दूसरे की दखल नहीं चाहिए. कश्मीर कल भी हमारा था और आज भी हमारा है और भविष्य में भी हमारा ही रहेगा. पीओके भी भारत का ही अंग है. भारत के अंदर वह ताकत है कि जिस दिन चाहे पीओके को भारत में मिला सकता है.”
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एससीएच/डीकेपी