मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, आनंद दुबे ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मुंबई, 11 जून . कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि इस मामले में अंतिम फैसला अब न्यायपालिका के हाथ में है और सभी की निगाहें Supreme Court के निर्णय पर टिकी हुई हैं. उन्होंने कहा कि अदालत कब अपना फैसला सुनाएगी, यह कहना मुश्किल है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक मामले लंबे समय से न्यायालयों में लंबित हैं.

आनंद दुबे ने कहा कि वह संगठन से जुड़ी नेता हैं और छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने कहा कि एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद नटराजन ने कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. ऐसे में उनका नामांकन रद्द किया जाना कई सवाल खड़े करता है.

दुबे का आरोप है कि चुनाव आयोग ने ऐसे उम्मीदवार का नामांकन निरस्त कर दिया, जिसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था. उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से यह धारणा बनती है कि यह लोकतांत्रिक चुनाव नहीं, बल्कि पूर्व निर्धारित चयन की प्रक्रिया बनती जा रही है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी.

नीति आयोग की बैठक पर आनंद दुबे ने कहा, “नीति आयोग की बैठकें हमेशा होती रही हैं, चाहे पिछली सरकारें रही हों या भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार. इन बैठकों का मकसद नीतियों, विकास योजनाओं, देश की तरक्की को आगे बढ़ाने के तरीकों, महंगाई से निपटने और रुपये की गिरती कीमत जैसे मुद्दों पर चर्चा करना होता है. इस नीति और नियम के मंथन से कौन से अमृत निकलता है, हमें इसको देखना है. हमें लगता है कि सकारात्मक राजनीति से ही देश आगे की तरफ बढ़ता है. हमारी पीएम मोदी से कोई दुश्‍वारियां नहीं हैं. हम उनके कुछ राजनीतिक कुनीतियों के विरोधी हैं. हम यही चाहते हैं कि जो भी निर्णय लिए जाएं, देशहित में हों.

उत्तर प्रदेश में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण जैसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों में विशेष सेल गठित करने के निर्देश पर प्रतिक्रिया देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि यह अच्‍छी बात है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की रोकथाम और निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है. कानून लागू करना और संबंधित मामलों पर कार्रवाई करना प्रशासन तथा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है.

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष के उस बयान पर भी आनंद दुबे ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि यदि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना है तो अन्य दलों को कांग्रेस में शामिल होना चाहिए. इस पर दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने के लिए सबसे पहले इंडिया गठबंधन को मजबूत और एकजुट करना होगा.

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस मूलरूप से कांग्रेस से निकली हुई पार्टी है और यदि वह कांग्रेस के साथ और अधिक समन्वय स्थापित करती है तो इससे विपक्षी गठबंधन को मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी कांग्रेस की विचारधारा से निकले राजनीतिक प्रवाह का हिस्सा रही है. उनका मानना है कि यदि विपक्षी दल एकजुट होकर साझा रणनीति बनाते हैं तो इससे कांग्रेस और राहुल गांधी दोनों की राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी.

आनंद दुबे ने कहा कि देश में सरकार बनाने के लिए लोकसभा में कम से कम 272 सीटों का बहुमत आवश्यक है. ऐसे में केवल राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि विपक्षी दलों को गंभीरता के साथ चुनावी रणनीति तैयार करनी होगी. उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन को भाजपा के खिलाफ प्रभावी मुकाबले के लिए साझा कार्यक्रम, बेहतर समन्वय और मजबूत संगठनात्मक ढांचे पर काम करना चाहिए. उनके अनुसार, यदि विपक्ष एकजुट होकर जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाता है तो आगामी चुनावों में वह अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है.

एएसएच/डीकेपी