
मुंबई, 21 जुलाई . महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बुधवार को मुंबई के आजाद मैदान में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी. मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इस आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा कि यह केवल बीएमसी के खिलाफ नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें किसी भी घटना के लिए जवाबदेही तय नहीं होती.
संदीप देशपांडे ने कहा कि करीब एक महीने पहले मुंबई में एक बेहद दुखद घटना हुई थी, जिसमें पेड़ गिरने से 11 साल के एक बच्चे की मौत हो गई. इस मामले की जांच के लिए बीएमसी ने एक जांच आयोग का गठन किया, लेकिन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतनी बड़ी घटना के बाद भी किसी की जवाबदेही तय नहीं होती, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है.
उन्होंने कहा कि केवल यही एक मामला नहीं है. कई बार सड़क पर चलते हुए लोग खुले नालों में गिरकर अपनी जान गंवा देते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में भी किसी पर कार्रवाई नहीं होती. देशपांडे ने आरोप लगाया कि हर गंभीर घटना के बाद जांच तो होती है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने से बचा जाता है. उनका कहना है कि इसी मानसिकता के खिलाफ मनसे सड़कों पर उतर रही है.
मनसे नेता ने कहा कि पार्टी ने एक सप्ताह पहले ही इस आंदोलन की घोषणा कर दी थी और बीएमसी आयुक्त को पत्र लिखकर अपनी मांगों से अवगत भी कराया था. इसके बावजूद उन्हें बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन में अहंकार इतना बढ़ गया है कि उसे लगता है कि कोई उसे चुनौती नहीं दे सकता. उनका कहना है कि इस सोच को बदलना जरूरी है.
देशपांडे ने मुंबई के नागरिकों से बड़ी संख्या में आजाद मैदान पहुंचकर इस आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की आवाज है जो जवाबदेही और पारदर्शिता चाहता है.
इस दौरान उन्होंने दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान की वजह से 20 लड़के-लड़कियों ने आत्महत्या की है, लेकिन कोई जवाबदेही नहीं है. यह केंद्र सरकार की विफलता है कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों से समय रहते संवाद नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं तो सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए, न कि उन्हें देशविरोधी, पाकिस्तानी या चीनी कहकर उनकी आवाज दबानी चाहिए.
देशपांडे ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत सबसे प्रभावी रास्ता होती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि घर में भी यदि कोई बच्चा नाराज होता है तो उससे संवाद किया जाता है, उसकी बात सुनी जाती है, न कि बल प्रयोग किया जाता है. उनका कहना है कि सरकार को भी विरोध कर रहे लोगों के साथ यही रवैया अपनाना चाहिए और उनकी शिकायतों का समाधान बातचीत के जरिए निकालना चाहिए.
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