अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचेगा मोबाइल नेटवर्क, सेना और टेलीकॉम कंपनी की बड़ी पहल

ईटानगर, 14 जून . देश के सीमावर्ती और दूरदराज क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. भारतीय सेना और एक निजी दूरसंचार कंपनी ने अरुणाचल प्रदेश के कामेंग जिले के दुर्गम इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं.

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने रविवार को बताया कि सैन्य और नागरिक सहयोग के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है. इस समझौते का उद्देश्य पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश के कामेंग जिले के दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में संचार बुनियादी ढांचे का विकास करना और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध कराना है.

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के जरिए उन गांवों और समुदायों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से संचार सुविधाओं से वंचित हैं. यह पहल देश के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों की एक बड़ी आवश्यकता को पूरा करेगी.

लेफ्टिनेंट कर्नल रावत के अनुसार, मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध होने से लोगों को सरकारी सेवाओं, डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी. इसके साथ ही स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा.

उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होंगे. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है.

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि मजबूत संचार व्यवस्था सीमावर्ती गांवों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी. यह केंद्र सरकार के समावेशी विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला कदम है.

भारतीय सेना का कहना है कि यह साझेदारी सीमावर्ती क्षेत्रों में टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण और ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

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