
जालंधर, 29 अक्टूबर . जालंधर को दुनिया भर में खेल उपकरणों के बड़े उत्पादन केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां के खेल उद्योग से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है. केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया के तहत वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 तक के लिए खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है. इसका फायदा जालंधर के खेल उद्योग को हो सकता है.
खेलो इंडिया के तहत स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए केंद्र सरकार ने 1,856.67 करोड़ रुपये का बजट रखा है. केंद्र सरकार की इस पहल से छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर बढ़ने और पंजाब के खेल उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि छोटे स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को बढ़ावा मिलने से उद्योग को नई मजबूती मिल सकती है. इससे बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और घरेलू स्तर पर काम करने वाले लोगों को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है.
स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से जुड़े एक व्यापारी ने से बातचीत में कहा, “बहुत खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी इस तरफ ध्यान दे रहे हैं. खेलों को लेकर उनका विजन अच्छा है. ‘खेलो इंडिया’ के तहत 1,800 करोड़ से ऊपर का बजट पास किया गया है. अब यह राज्य सरकारों पर निर्भर करता है कि वे इस फंड का कैसे उपयोग करती हैं. जालंधर के खेल उद्योग को निश्चित रूप से इसका लाभ मिलेगा.”
उन्होंने कहा कि लंबे समय से हम जालंधर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर की मांग कर रहे हैं. वह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है. पंजाब की मान सरकार ने सत्ता में आने के बाद कहा था कि जालंधर में खेल विश्वविद्यालय खोला जाएगा, लेकिन इससे जुड़ा भी कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है. अब इस सरकार का कार्यकाल भी पूरा होने वाला है.
एक अन्य व्यापारी ने से कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने काफी समय से खेलो इंडिया का नारा दिया हुआ है. हम भी चाहते हैं कि सारा इंडिया खेले और लोग नशे से दूर रहें और छोटे व्यापारियों को फायदा हो. अगर योजना जमीनी स्तर पर पूरी सफलता से लागू होती है, तो जालंधर के व्यापारियों को फायदा होगा और इससे जुड़े सभी लोगों को फायदा होगा. खेल इंडस्ट्री से गांव-गांव की महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं. उन्हें भी फायदा होगा.”
एक युवा व्यापारी ने कहा, “मोदी सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया है. जालंधर खेल इंडस्ट्री से जुड़े उपकरणों का हब है. फिलहाल थोड़े लो स्केल पर है. केंद्र सरकार की योजना से इंडस्ट्री को निश्चित रूप से फायदा होगा. यहां पहले से ही छोटे-छोटे कारखाने चल रहे हैं. योजना लागू किए जाने के बाद छोटे कारखानों को फायदा होगा और हजारों लोगों को लाभ होगा.”
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ समय के दौरान जीएसटी, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और ऑर्डर में कमी जैसी चुनौतियों के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है. ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाला प्रोत्साहन इस क्षेत्र के लिए राहत लेकर आ सकता है. छोटे-छोटे घरों में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा काम पहुंचने पर परिवारों को अपने ही इलाके में रोजगार मिल सकता है. इससे स्थानीय स्तर पर आमदनी बढ़ने के साथ-साथ जालंधर की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलने की संभावना है.”
स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से जुड़े अन्य प्रतिनिधियों का कहना है कि जब बड़े मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को छोटे उद्योगों से जोड़ा जाएगा, तो काम का बंटवारा होगा और अधिक परिवारों को रोजगार मिल सकता है. इससे युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत भी कम हो सकती है.
जालंधर के स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए छोटे उद्योगों की भागीदारी अहम मानी जा रही है. अब देखना होगा कि सरकार की इस पहल का लाभ जमीनी स्तर पर छोटे कारोबारियों, कामगारों और युवाओं तक कितना पहुंचता है.
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पीएके