रग्बी प्रीमियर लीग: भारत में ‘पोस्टर बॉय’ हैं मोहित खत्री, चेन्नई बुल्स को लगातार दूसरा खिताब जिताना मकसद

नई दिल्ली, 15 जून . रग्बी प्रीमियर लीग (आरपीएल) के पहले संस्करण की विजेता ‘चेन्नई बुल्स’ इस सीजन खिताब बचाने के इरादे से उतरेगी. इस लीग ने घरेलू खिलाड़ियों को दुनिया के कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ खेलने और उनसे सीखने का मौका दिया है. ऐसे में टीम के उप-कप्तान मोहित खत्री इस प्रतियोगिता को भारतीय रग्बी में एक बड़ा बदलाव मानते हैं.

रग्बी प्रीमियर लीग, दुनिया की पहली फ्रेंचाइजी-आधारित रग्बी सेवन्स लीग है, जो 16 जून को अपने दूसरे सीजन के साथ वापसी कर रही है. मौजूदा चैंपियन चेन्नई बुल्स एक बार फिर नए सीजन में जीत की प्रबल दावेदार के तौर पर उतर रही है.

फ्रेंचाइजी ने एक बार फिर सितारों से सजी टीम तैयार की है, जिसकी कमान ओलंपिक 2024 में अर्जेंटीना की कप्तानी कर चुके सैंटियागो अल्वारेज के हाथों में है. मोहित खत्री को उप-कप्तान बनाया गया है.

बुल्स ने मैदान के बाहर भी नई ऊंचाइयां हासिल की हैं. चेन्नई बुल्स 2025-26 सीजन के दौरान, फिजी कोरल कोस्ट सेवंस और हांगकांग टेंस जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय टीम बनी.

खत्री भारतीय रग्बी के स्टार खिलाड़ी हैं, जिन्हें देश में इस खेल का ‘पोस्टर बॉय’ कहा जाता है. भले ही इस पहचान से उन्हें लोकप्रियता और जिम्मेदारी दोनों मिलती हैं, लेकिन भारत के पूर्व कप्तान का कहना है कि उन्होंने इसे बोझ न बनने देना सीख लिया है.

मोहित खत्री ने ‘ ’ के साथ खास बातचीत में कहा, “असल में, ‘पोस्टर बॉय’ होना अच्छी बात है. बहुत से जाने-पहचाने और अनजान लोग आपको पहचानने लगते हैं और इसके साथ ही आप पर एक जिम्मेदारी भी आती है, लेकिन इससे मुझ पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता, क्योंकि मेरा अपना काम और फोकस करने के लिए चीजें हैं. मैं अपना पूरा ध्यान वहीं लगाने की कोशिश करता हूं और इसे बोझ नहीं मानता.”

खत्री के लिए, रग्बी में उनकी सबसे गर्व भरी यादें अंतरराष्ट्रीय सफलता से नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के साथ हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने और राज्य को भारतीय रग्बी में एक मजबूत ताकत के रूप में स्थापित करने में मदद करने से जुड़ी हैं.

उन्होंने कहा, “मुझे पहली बड़ी उपलब्धि सीनियर नेशनल से मिली, जहां मैं अपने राज्य, हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहा था. उस टीम में मेरे 4 चचेरे भाई भी खेलते थे. इसलिए मुझे बहुत अच्छा लगता है कि हम अपने भाइयों के नक्शेकदम पर चले, एक टीम में खेले, अपने परिवार, अपनी संस्कृति और अपने राज्य का प्रतिनिधित्व किया और फिर पूरे भारत में जीत हासिल की और दबदबा बनाया. इससे मुझे काफी आत्मविश्वास मिलता है.”

हरियाणा और भारतीय नेशनल टीम दोनों की कप्तानी कर चुके खत्री अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं से भरी एक फ्रेंचाइजी के उप-कप्तान के तौर पर एक खास स्थिति में हैं. वह इस भूमिका को रग्बी के कुछ सबसे सफल खिलाड़ियों से सीखने के मौके के तौर पर देखते हैं.

मोहित खत्री ने कहा, “अब तक मैंने अपनी राज्य टीम और राष्ट्रीय टीम की कप्तानी की है. अब मुझे दुनिया के टॉप-लेवल एथलीट्स के साथ खेलने का मौका मिला है. हमें कुछ नया सीखने का मौका मिला है, जैसे रग्बी में दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी क्या पसंद करते हैं? वे किन चीजों का पालन करते हैं? कैसे खेलते हैं? उनके नियम और कायदे क्या हैं? लीडरशिप के मामले में भी, यह मेरे लिए सीखने का एक बहुत अच्छा अनुभव होगा. जैसे कि टॉप लेवल से सीखना. हमारे कप्तान अर्जेंटीना से हैं. अर्जेंटीना पिछले दो-तीन वर्षों से जीत रही है. वे चैंपियन रहे हैं. ऐसा लगता है कि वे दुनिया में सबसे ऊपर हैं. मुझे इस टूर्नामेंट से लीडरशिप और गेम से जुड़ी कुछ स्किल्स सीखने का मौका मिला.”

खत्री ने ‘दिल्ली हरिकेंस’ को भी याद किया, जो वह क्लब है जहां से उनके रग्बी सफर की शुरुआत हुई थी. उन्होंने आज उन्हें एक खिलाड़ी के तौर पर तैयार करने का श्रेय क्लब के माहौल और ग्रासरूट लेवल के स्ट्रक्चर को दिया.

उन्होंने कहा, “मैंने रग्बी की शुरुआत दिल्ली हरिकेंस के साथ ही की थी. असल में, जब मैंने शुरू किया था, तो मुझे रग्बी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी—न कोई नियम, न कोई रेगुलेशन, और न ही कोई अंदाजा कि भविष्य में मैं क्या करूंगा या रग्बी के साथ मेरा क्या रिश्ता होगा. रग्बी से मुझे जो कुछ भी मिला है, वह दिल्ली हरिकेंस की वजह से ही मिला है. मैंने वहां अपनी बेसिक स्किल्स सीखीं.”

रग्बी प्रीमियर लीग के असर पर बात करते हुए खत्री ने कहा कि पहले सीजन में टूर्नामेंट के अनोखे फॉर्मेट का अनुभव करने के बाद खिलाड़ियों और टीमों, दोनों ने ही काफी बदलाव अपनाए हैं. उन्होंने कहा, “पहले सीजन में, यह असल में सभी के लिए नया था. जैसे गेम, गेमप्ले और खेलने का तरीका. आम तौर पर, सेवंस रग्बी में 7-7 मिनट के दो हाफ होते हैं. लेकिन यह आरपीएल बिल्कुल अलग है. इसमें 4 मिनट के क्वार्टर होते हैं. यानी 4 मिनट के 4 क्वार्टर. तो असल में यह सभी के लिए नया था, हमारे लिए भी और बाहर से आए खिलाड़ियों के लिए भी. इससे हमने सीखा और फिटनेस का एक नया स्तर हासिल किया, जैसे हमें कैसे ट्रेनिंग करनी चाहिए ताकि हम 4-4 मिनट के 4 क्वार्टर खेल सकें. इसलिए पिछले साल के मुकाबले इस साल भारतीय खिलाड़ियों ने भी काफी सुधार किया है. उन्होंने खेलने की रणनीति बनाई है और पिछले साल कुछ स्टैंडर्ड तय किए थे. अब इस साल वे और बेहतर करने और ज्यादा से ज्यादा आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे.”

खत्री ने रग्बी इंडिया के प्रेसिडेंट राहुल बोस के योगदान को लेकर कहा, “हमारी कई बार बात हुई है, जब से राहुल बोस रग्बी इंडिया से जुड़े हैं और अध्यक्ष बने हैं, तब से ज्यादा स्पॉन्सर जुड़ रहे हैं. रग्बी का स्वरूप और दौर बदल गया है. उन्होंने आरपीएल जैसा अच्छा टूर्नामेंट दिया है. इस टूर्नामेंट की वजह से हम ओलंपियनों के साथ खेल पा रहे हैं. अगर यह टूर्नामेंट नहीं होता, तो हम यह मौका गंवा देते. वर्ना हम उन्हें सिर्फ टेलीविजन पर ही देख पाते. लेकिन इस टूर्नामेंट, रग्बी इंडिया और राहुल बोस की वजह से हमें दुनिया के बेहतरीन एथलीट्स और ओलंपियनों के साथ खेलने का मौका मिल रहा है.”

आरएसजी