
चेन्नई, 17 सितंबर . तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में पांच कोणीय मुकाबले की तस्वीर साफ होती दिख रही है. गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान सत्तारूढ़ टीवीके, डीएमके, एआईएडीएमके, नाम तमिलर कच्ची और वाम दलों के उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए.
मदुरांतकम (एससी) विधानसभा सीट चेंगलपट्टू जिले में, जबकि धारापुरम (एससी) सीट तिरुप्पुर जिले में है. दोनों सीटों पर प्रमुख राजनीतिक दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है.
दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय सीमा बुधवार दोपहर 3 बजे समाप्त हुई थी. कुल 99 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे. इनमें आधिकारिक उम्मीदवारों के अलावा वैकल्पिक उम्मीदवारों और निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन भी शामिल थे.
गुरुवार को चुनाव अधिकारियों ने नामांकन पत्रों की जांच की. इस दौरान यह देखा गया कि उम्मीदवारों ने चुनाव नियमों के तहत निर्धारित कानूनी और अन्य अनिवार्य शर्तों को पूरा किया है या नहीं.
मदुरांतकम में टीवीके उम्मीदवार मरगाथम कुमारवेल, डीएमके उम्मीदवार परंथमन, एआईएडीएमके उम्मीदवार कनिथा संपत, नाम तमिलर कच्ची की उम्मीदवार जानकीरमन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की उम्मीदवार सुगंती के नामांकन स्वीकार कर लिए गए.
मदुरांतकम में कुल 48 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे, जिनमें से 32 स्वीकार किए गए, जबकि 16 नामांकन खारिज कर दिए गए. अधिकारियों के अनुसार, खारिज किए गए नामांकन में एक या अधिक अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं की गई थीं.
वहीं, धारापुरम में टीवीके उम्मीदवार सत्यबामा, डीएमके उम्मीदवार सुगन्या, एआईएडीएमके उम्मीदवार भानुमति, नाम तमिलर कच्ची की उम्मीदवार कार्तिका और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार लक्ष्मणन के नामांकन वैध पाए गए.
धारापुरम में कुल 51 नामांकन पत्रों की जांच की गई. इनमें से 22 स्वीकार किए गए, जबकि 29 नामांकन निर्धारित शर्तें पूरी नहीं करने के कारण खारिज कर दिए गए.
दोनों सीटों पर अंतिम उम्मीदवारों की संख्या नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद स्पष्ट होगी. वैध पाए गए नामांकन वाले उम्मीदवार चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित अवधि के भीतर अपना नाम वापस ले सकते हैं.
सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ दो प्रमुख द्रविड़ दलों, नाम तमिलर कच्ची और वाम दलों के अलग-अलग उम्मीदवार मैदान में होने के कारण दोनों उपचुनावों में व्यापक चुनाव प्रचार देखने को मिल सकता है. इन चुनावों के नतीजों पर भविष्य के राजनीतिक मुकाबलों से पहले संबंधित दलों की चुनावी ताकत और संगठनात्मक पहुंच के संदर्भ में भी नजर रहेगी.
–
डीएससी