नौसेना का त्रिशूल मिस्र से रवाना हुआ, श्रीलंका के साथ स्लिनेक्स-26 अभ्यास

नई दिल्ली, 20 सितंबर . भारत और श्रीलंका के बीच वार्षिक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास स्लिनेक्स-26 का 13वां संस्करण विशाखापट्टनम में चल रहा है. यह अभ्यास से 21 सितंबर तक चलेगा. वहीं, भारत के त्रिशूल और मिस्र की नौसैनिक पोत आईएनएस बरनीस में पासेक्स अभ्यास को अंजाम दिया है.

भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल ने मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह का तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया है और अलेक्जेंड्रिया से रवाना हो चुका है. दोनों देशों के साथ इस नौसैनिक अभ्यास का उद्देश्य नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग, आपसी समझ और परिचालन तालमेल को और मजबूत करना रहा है. श्रीलंका के साथ हो रहे अभ्यास में भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आईएनएस कवरत्ती और बेड़े का टैंकर आईएनएस ज्योति हिस्सा ले रहे हैं.

वहीं, श्रीलंका नौसेना का प्रतिनिधित्व एसएलएनएस सिंदुराला कर रहा है. नौसेना के मुताबिक, स्लिनेक्स की शुरुआत 2005 में हुई थी. समय के साथ यह भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है. इस अभ्यास के जरिए दोनों नौसेनाएं एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने के साथ समुद्री अभियानों में बेहतर तालमेल विकसित करती हैं. अभ्यास के पहले चरण यानी हार्बर फेज की शुरुआत पूर्वी नौसेना कमान के तत्वावधान में हुई.

इस दौरान आईएनएस कवरत्ती पर श्रीलंका के जहाज एसएलएनएस सिंदुराला के चालक दल के लिए स्वागत समारोह आयोजित किया गया. हार्बर फेज में पेशेवर बातचीत, एक-दूसरे के जहाजों का दौरा, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान, योग, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल हैं. इसके बाद होने वाले समुद्री चरण में दोनों नौसेनाएं समुद्र में संयुक्त गतिविधियों के जरिए परिचालन तालमेल और परस्पर संचालन क्षमता को बढ़ाने पर फोकस करेंगी. स्लिनेक्स-26 भारत की महासागर दृष्टि के अनुरूप एक सुरक्षित, स्थिर और समावेशी समुद्री वातावरण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है. इससे भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

वहीं, भारत और मिस्र के बीच समुद्री मित्रता को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल ने मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह का तीन दिवसीय दौरा पूरा किया है. जहाज 17 सितंबर को अलेक्जेंड्रिया से रवाना हुआ. बंदरगाह में प्रवेश से पहले आईएनएस त्रिशूल ने मिस्र की नौसेना के पोत आईएनएस बरनीस के साथ पासेक्स किया.

बंदरगाह दौरे के दौरान मिस्र में भारत के राजदूत सुरेश के रेड्डी ने आईएनएस त्रिशूल का दौरा किया. जहाज के कमांडिंग ऑफिसर ने विश्व युद्धों में शहीद हुए वीर सैनिकों की स्मृति में चैटबी युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की. आईएनएस त्रिशूल के चालक दल ने मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और कर्मियों के साथ बातचीत की. इस दौरान दोनों पक्षों ने आपसी संचालन क्षमता को बेहतर बनाने और समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.

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जीसीबी/एसके