
नई दिल्ली, 9 सितंबर . कांग्रेस और भाकपा (सीपीआई) ने बुधवार को उम्मीद जताई कि उनके सहयोगियों सहित अन्य राजनीतिक दल भी वंदे मातरम के निर्धारित दो छंदों को गाने की परंपरा का पालन करेंगे. दूसरी ओर, भाजपा ने राष्ट्रीय गीत के पूरे गायन के दौरान सम्मान में खड़े रहने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की सराहना की.
से बात करते हुए कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा, “हमारे महासचिव (संगठन) ने कल इस पर एक विस्तृत बयान जारी किया था. जहां भी हमारी सरकार है, वहां हमारी सरकारें ‘वंदे मातरम’ के उन्हीं दो छंदों को गाती हैं जिन्हें उस समय हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तय किया था.”
उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद है कि हमारे सहयोगी दलों सहित अन्य लोग भी इसका पालन करेंगे, क्योंकि ये दो छंद देश को एकजुट करने का काम करते हैं.”
सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संतोष ने कहा कि हर राजनीतिक दल को इस मुद्दे पर अपना रुख तय करने का अधिकार है.
उन्होंने कहा, “फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला अनुभवी और जाने-माने राजनेता हैं, और उन्हें अपना रुख तय करने का पूरा अधिकार है. सीपीआई का नजरिया अलग है और अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग हो सकती है.”
हालांकि, संतोष ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए और इस मुद्दे को बेवजह तूल देने की कोशिशें उचित नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “हमें सिर्फ ‘वंदे मातरम’ पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा करनी चाहिए.”
वहीं, बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरा देश इस मुद्दे पर उसके विरोध को देख रहा है. उन्होंने कहा, “शुरू से ही कांग्रेस ने इस देश की विचारधारा और विरासत को नुकसान पहुंचाया है. और आज, जब राष्ट्रगीत की बात आती है, तो कांग्रेस या तो तुष्टिकरण की राजनीति में लगी है या फिर पता नहीं किसे खुश करना चाहती है, और ऐसा व्यवहार कर रही है.”
जायसवाल ने कहा कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए.
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी उमर और फारूक अब्दुल्ला की तारीफ की कि वे पूरे गायन के दौरान खड़े रहे.
उन्होंने से कहा, “जहां तक उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला की बात है, भले ही हमारे बीच नीतिगत मामलों पर मतभेद हों, लेकिन हम दोनों को सलाम करते हैं. दोनों ने वंदे मातरम का सम्मान किया. उन्होंने केंद्र सरकार के नए फ़ैसले का सम्मान किया और सभी छह छंदों के दौरान खड़े रहे. कांग्रेस को इससे सीखना चाहिए. यहां तक कि एनसीपी भी कह रही है कि वह वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने से सहमत नहीं है. और कांग्रेस के महासचिव अभी भी कह रहे हैं कि वे दो से ज़्यादा छंद नहीं गाएंगे. तो, क्या देश कांग्रेस के कहने पर चलेगा? यह देश कानून और संविधान से चलता है.”
–
पीआईएम/एएस