
श्रीनगर, 22 सितंबर . जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को चल रहे सत्र के दौरान सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के कई विधायकों ने पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी फिर से बहाल करने की मांग की.
2019 से पहले जम्मू-कश्मीर में 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी होती थी.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और कहा कि आधुनिक जम्मू-कश्मीर को बनाने में स्वर्गीय शेख अब्दुल्ला के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके ऐतिहासिक सुधारों जैसे ‘जमीन जोतने वाले को जमीन का मालिकाना हक’, यूनिवर्सिटी लेवल तक मुफ्त शिक्षा और महिलाओं का सशक्तिकरण ने एक प्रगतिशील जम्मू-कश्मीर की नींव रखी.
इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए एनसी के सीनियर नेता और विधायक मुबारक गुल ने कहा कि हम दशकों तक सत्ता में रहे, लेकिन हमने कभी कोई छुट्टी नहीं हटाई. हमने कभी इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं की. अगर भाजपा या किसी दूसरी पार्टी के नेता के नाम पर कोई छुट्टी थी, तो हमने उसे कभी नहीं हटाया. छुट्टियां सामूहिक यादों का प्रतीक होती हैं.
उन्होंने कहा कि 5 दिसंबर की छुट्टी को फिर से शुरू करना जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए शेख अब्दुल्ला के योगदान को सम्मान देने जैसा होगा.
अनुच्छेद 370 हटने के बाद 13 जुलाई (शहीद दिवस) और 5 दिसंबर (शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती) की छुट्टियां खत्म कर दी गईं. इसके बजाय, 2019 से केंद्र शासित प्रदेश में 23 सितंबर को स्वर्गीय महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी मनाई जाने लगी.
एनसी, महाराजा हरि सिंह की जयंती पर 23 सितंबर को छुट्टी मनाने का भी विरोध करती रही है. उनका कहना है कि स्वर्गीय महाराजा एक निरंकुश शासक थे और उनके शासन से आजादी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर को ऐसे राजा की याद में छुट्टी नहीं मनानी चाहिए जिन्होंने लोगों के जनादेश के बिना शासन किया था.
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डीकेएम/वीसी