एनडीए सांसदों का केजरीवाल पर तंज, कहा-‘केजरीवाल ई20 फ्यूल पॉलिसी पर कर रहे राजनीति’

नई दिल्ली, 4 अगस्त . संसद के मानसून सत्र के बीच केंद्र सरकार की ई20 फ्यूल पॉलिसी, बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों और संसद की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. भाजपा सांसदों ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के प्रस्तावित विरोध मार्च की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया. वहीं, उपचुनाव के परिणामों पर एनडीए नेताओं ने जनता के फैसले का सम्मान करने की बात कही और समीक्षा की आवश्यकता स्वीकार की.

भाजपा सांसद तरुण चुघ ने केंद्र सरकार की ई20 फ्यूल पॉलिसी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री आवास तक विरोध मार्च की घोषणा को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त जानकारी के बेबुनियाद और निराधार बातें करना उचित नहीं है. तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि केजरीवाल का यह अभियान पूरी तरह राजनीतिक है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन (ई20) को लेकर सभी आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण और अध्ययन किए जा चुके हैं तथा इस नीति को लागू करने में किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई है. इथेनॉल का उत्पादन मक्का, गन्ना और अन्य कृषि फसलों से किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है.

उन्होंने कहा कि कई देशों में दशकों से इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग किया जा रहा है और भारत में भी इसे वैज्ञानिक तरीके से लागू किया गया है. अरविंद केजरीवाल एक ऐसे मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहते हैं, जिसका समाधान पहले ही हो चुका है. उन्होंने कहा कि केजरीवाल को न देश की चिंता है, न वाहन चालकों की और न ही आम लोगों की समस्याओं की बल्कि वे केवल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं.

भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा ने भी केजरीवाल पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केजरीवाल स्वयं को अराजकतावादी बताते रहे हैं और उनके बयान उसी छवि को मजबूत करते हैं. अब यह प्रतिस्पर्धा चल रही है कि सबसे बड़ा अराजकतावादी राहुल गांधी या अरविंद केजरीवाल है. उन्होंने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग की आवश्यकता पर पहले भी विभिन्न विशेषज्ञों और नेताओं ने समर्थन व्यक्त किया है. उनके अनुसार, वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी कर इस मुद्दे को विवाद का विषय बनाना केवल राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है.

उधर, बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के परिणामों पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नतीजे कुछ हद तक चौंकाने वाले हैं लेकिन लोकतंत्र में हार और जीत सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि जनता का फैसला सर्वोपरि है और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी को इस हार के कारणों की गंभीर समीक्षा करनी होगी ताकि भविष्य में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके.

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी उपचुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए जनता के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करता है, लेकिन विपक्ष को इस परिणाम पर जरूरत से ज्यादा उत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है.

उन्होंने 2009 के बिहार उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए 17 में से 12 सीटें हार गई थी, लेकिन इसके बाद 2010 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग 89 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ जीत हासिल की थी. उपचुनाव के नतीजों को अंतिम राजनीतिक तस्वीर नहीं माना जाना चाहिए.

वहीं केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में चढ़ावा मामले को लेकर मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, एसआईटी जांच कर रही है और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं.

उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष किसी मुद्दे को संसद में उठाना चाहता है तो उसे निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित होने से रोकना है.

भाजपा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने संसद में जारी गतिरोध पर कहा कि जब विपक्ष स्वयं सदन में हंगामा और अव्यवस्था पैदा कर रहा है तो सरकार पर संसद नहीं चलने देने का आरोप लगाना उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सदन सुचारु रूप से चले, विपक्ष अपनी बात रखे और सरकार उसका जवाब दे. अंततः जनता ही तय करेगी कि संसद के कामकाज में बाधा डालने के लिए कौन जिम्मेदार है.

एसएके/पीएम