
नई दिल्ली, 16 मई . नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जिस तरह पेपर लीक हुआ, यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए था. उन्होंने दोबारा परीक्षा कराने के केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया और छात्रों को विरोध प्रदर्शन से दूर रहने की सलाह दी.
पेपर लीक पर वाइस चांसलर योगेश सिंह ने से बात करते हुए कहा, “मुझे एनटीए के संगठनात्मक ढांचे के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन यह सच है कि इसके लिए वे ही जिम्मेदार हैं. वे ही यह परीक्षा आयोजित करवा रहे थे, इसलिए यह सुनिश्चित करना उनकी ही जिम्मेदारी है कि इस तरह की चूक न हो.”
योगेश सिंह से पूछा गया कि नीट परीक्षा के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों से वे क्या कहेंगे, तो उन्होंने कहा, “एनटीए ने अब नई तारीख का ऐलान कर दिया है. परीक्षा 21 जून को होगी. पहले भी मुझे नहीं लगा था कि विरोध प्रदर्शन की कोई जरूरत है, और आज भी मैं यही कहूंगा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह एक संवेदनशील विषय है.”
उन्होंने कहा कि यह हमारे छात्रों के भविष्य से जुड़ा है. जिस तरह से प्रश्न पत्र लीक हुआ या उसमें सेंध लगी, वैसा नहीं होना चाहिए था. इस बात पर कोई बहस नहीं है. अगर आरोपी पकड़ा न जाता, अगर कार्रवाई न की जाती, और अगर परीक्षा रद्द न की जाती, तो ऐसे कई छात्रों को एडमिशन मिल जाता जो इसके हकदार नहीं थे. उन छात्रों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय होता जो मेहनती थे, सीधे-सादे थे, पूरी लगन से पढ़ाई कर रहे थे, और जिन्हें वह प्रश्न पत्र नहीं मिला था. सरकार ने सही फैसला लिया.
इसके साथ ही, योगेश सिंह ने कहा, “बहुत सारे संगठनों से भी आग्रह करना चाहता हूं कि यह राजनीति से कहीं बड़ा विषय है, इसलिए विरोध प्रदर्शन का रास्ता छोड़ देना चाहिए. इससे देश और बच्चों का भविष्य जुड़ा है. बच्चों से भी कहूंगा कि पूरे मन से तैयारी करें, क्योंकि परीक्षा में कुछ ही दिन बचे हैं.”
जब पूछा गया कि क्या एनटीए के ढांचे में कुछ बदलाव या संशोधन होने चाहिए, तो दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने कहा, “अभी तक 21 जून की परीक्षा घोषित हो चुकी है, इसलिए अब हम कई समाधानों पर चर्चा करेंगे, ताकि कोई भ्रम न पैदा हो. आगे चलकर चीजें कैसे संचालित होनी चाहिए, इस पर निश्चित रूप से चर्चा होगी.”
उन्होंने कहा कि अगली परीक्षा कंप्यूटर-आधारित टेस्ट होगी. इसके कई अलग-अलग पहलू हैं, जिनकी हम सभी को जांच करनी होगी. क्योंकि साइबर हमले बहुत बार होते रहते हैं. हम सिस्टम बना सकते हैं, लेकिन जब तक इन गिरोहों और समूहों को तोड़ा नहीं जाता, तब तक हमारे सामने चुनौतियां बनी रहेंगी. मुझे पूरा भरोसा है कि इस बार इस मामले की तह तक जाया जाएगा और जब तक इन लोगों को डराकर रोका नहीं जाता, तब तक वे सिस्टम को बेहतर बनाने में कहीं न कहीं बाधाएं पैदा करते रहेंगे.
नीट-यूजी पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारियों को क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर योगेश सिंह बोले, “अभी 21 जून को होने वाली परीक्षा की तारीख घोषित कर दी गई है. अगर हम इस समय बहुत सारे समाधानों पर बहस करना शुरू कर देंगे, तो इससे केवल भ्रम ही पैदा होगा. आगे कैसे बढ़ना है, इस पर निश्चित रूप से बाद में विचार-विमर्श किया जाएगा.”
जब वाइस चांसलर योगेश सिंह से पूछा गया कि क्या दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस का राजनीतिकरण किया जा रहा है, तो उन्होंने कहा, “राजनीति पर बात करना असल में मेरा विषय नहीं है, इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन मैं संगठनों से भी, खासकर छात्र संगठनों से यह कह रहा हूं, कृपया ऐसा न करें, इस विषय को छोड़ दें. हर चीज में राजनीति करना अच्छी बात नहीं है.”
योगेश सिंह ने आगे कहा, “यह देश के लिए एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है, इसलिए इसे छोड़ दें. यह बच्चों के भविष्य से जुड़ा है. इससे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है और मैं सभी से कहता हूं कि लोगों को भड़काएं नहीं. जिस तरह से कुछ बयान दिए जा रहे हैं और लोगों को भड़काया जा रहा है, उसकी कोई जरूरत नहीं है. इससे माहौल खराब होता है, जहरीला बनता है और हमें इससे बचना चाहिए.”
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डीसीएच/