
मुंबई, 7 नवंबर . शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला. उन्होंने सोनिया गांधी की बाबरी मस्जिद विध्वंस को लेकर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए भाजपा पर समाज में विभाजन और नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से दो राजनीतिक उत्तराधिकारियों को लेकर दिए गए बयान, एनसीपी और एनसीपी-एसपी के संभावित विलय और राजीव गांधी फाउंडेशन को मिलने वाली विदेशी फंडिंग पर भाजपा के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी.
सोनिया गांधी की बाबरी मस्जिद विध्वंस पर की गई टिप्पणी के संबंध में अरविंद सावंत ने कहा कि उनकी बात 100 फीसदी सच है. भाजपा का संगठन विघटनकारी विचारों पर आधारित है और उसके विचार जोड़ने के बजाय समाज को तोड़ने का काम करते हैं. उनके विचारों में प्रेम के बजाय घृणा और द्वेष दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने अपनी किताब में जो बातें लिखी हैं, वे उनके अनुभवों पर आधारित हैं. सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा की कथनी और करनी में बहुत अंतर है. उन्होंने कहा कि दिखाने के दांत अलग हैं और खाने के दांत अलग. देश में जाति और धर्म के आधार पर जो विभाजन देखने को मिला है, उसके लिए उन्होंने 2014 के बाद की सत्ता को जिम्मेदार ठहराया.
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के दो राजनीतिक उत्तराधिकारियों को लेकर दिए गए बयान पर भी सावंत ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि आरोप लगाना, लोगों को गुमराह करना और भ्रम पैदा करना भाजपा की राजनीति का हिस्सा बन गया है. परिवारवाद के आरोपों पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं, लेकिन इतिहास की सच्चाई बताना चाहते हैं. उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बिताए गए कारावास का उल्लेख करते हुए भाजपा से सवाल किया कि पार्टी में ऐसा कौन नेता है, जिसने देश की आजादी के लिए उतना जेल में समय बिताया हो.
सावंत ने मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू की संपत्ति का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार ने अपनी संपत्ति तक देश के लिए समर्पित की थी. उन्होंने आनंद भवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय की संपत्ति भी देश के प्रति कुर्बान की गई थी. उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पास आज अपना मकान तक नहीं है. सावंत ने भाजपा नेताओं के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि हेडगेवार शुरुआत में कांग्रेस में काम करते थे, लेकिन महात्मा गांधी की ओर से आजादी की लड़ाई में जेल जाने और लाठीचार्ज का सामना करने की बात कही जाने पर कुछ लोग पीछे हट गए थे. उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम लेते हुए भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान नहीं दिया, वे आज राष्ट्र की एकता और अखंडता की बात कर रहे हैं.
एनसीपी-एसपी और एनसीपी के संभावित विलय की खबरों पर अरविंद सावंत ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, क्योंकि यह दोनों पार्टियों का आंतरिक मामला है. उन्होंने कहा कि वह दोनों पक्षों के नेताओं के करीब से काम कर चुके हैं. उनकी शरद पवार से भी मुलाकात होती रही है और अजित पवार से उनकी बातचीत अपेक्षाकृत अधिक हुई है. हालांकि, उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों पार्टियों के नेता अपनी कुर्सी बचाए रखने में लगे हुए हैं.
इस दौरान सावंत ने भाजपा पर परिवारवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता विपक्षी दलों पर परिवारवाद का आरोप लगाते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी के नेताओं के परिवारों के बारे में भी जनता को बताना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि भाजपा के नेताओं के बेटे और बेटियां किन पदों पर हैं और उनकी राजनीतिक भूमिका क्या है. सावंत ने कहा कि जब भाजपा के अपने नेताओं के परिवार राजनीति और महत्वपूर्ण पदों पर हैं, तो केवल विपक्ष पर परिवारवाद का आरोप लगाना उचित नहीं है.
राजीव गांधी फाउंडेशन को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को लेकर भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी सावंत ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है और इस विषय पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के विचारों का उल्लेख किया. सावंत ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने स्पष्ट किया था कि मुसलमानों से उनकी कोई लड़ाई या नफरत नहीं है. उनकी अपेक्षा केवल इतनी थी कि सभी लोग देश और इस मिट्टी के प्रति निष्ठावान रहें.
उन्होंने कहा कि इतिहास में मुगलों की ओर से कई मंदिरों को ध्वस्त किए जाने की घटनाएं हुई हैं. काशी, मथुरा और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर बात करना नफरत फैलाना नहीं है. उन्होंने अयोध्या का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां का मुद्दा अब हल हो चुका है.
सावंत ने शिवसेना में मुस्लिम नेताओं की भूमिका का उदाहरण देते हुए शब्बीर भाई शेख का नाम लिया. उन्होंने कहा कि शब्बीर भाई शेख शिवसेना के गठन के समय से लेकर अंत तक पार्टी के साथ रहे. वह नमाजी थे और मुस्लिम समुदाय से आते थे, लेकिन पार्टी में उनके योगदान और भूमिका को हमेशा महत्व दिया गया. सावंत के मुताबिक, यह दिखाता है कि हिंदुत्व का अर्थ किसी धर्म के प्रति नफरत करना नहीं है.
उन्होंने आगे कहा कि हिंदुत्व राष्ट्रीयत्व का विषय है. इसे घृणा के बजाय देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता से जोड़कर देखा जाना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व धर्मांधता का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा और एकजुटता का विचार है.
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पीएसके