
टोक्यो, 11 अगस्त . जापान में भालुओं से लोग खौफजदा है. रिहायशी इलाकों में जब-तब ये दिख जा रहे हैं. लोग डरे सहमे हैं तो वहीं इससे निपटने वाले स्थानीय प्रशासन के कर्मचारियों पर भी काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है. एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, भालुओं से जुड़ी शिकायतों का जवाब देने वाले 40 प्रतिशत से अधिक स्थानीय निकायों को अभद्र शिकायतों और बेहद लंबे फोन कॉल का सामना करना पड़ा.
क्योडो समाचार एजेंसी ने मंगलवार को एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जापान सरकार ने इस स्थिति का आकलन करने के लिए 40 प्रीफेक्चरल और नगरपालिका प्रशासन का सर्वेक्षण किया. इनमें से 17 स्थानीय निकायों ने कहा कि भालुओं से संबंधित शिकायतों ने उनके नियमित कामकाज को प्रभावित किया. कुछ स्थानीय प्रशासन ने केंद्र सरकार से ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने की मांग भी की है.
इन 17 निकायों में से 10 ने बताया कि उन्हें ऐसी शिकायतों का जवाब देने में काफी समय लग रहा है. कई फोन कॉल एक घंटे से भी ज्यादा समय तक चले. वहीं, पांच स्थानीय निकायों ने कहा कि उनकी वेबसाइट और ईमेल के जरिए शिकायतों और संदेशों की बाढ़ आ गई.
कुछ मामलों में लोगों का रवैया बेहद आक्रामक रहा. अधिकारियों को ऐसे संदेश मिले जिनमें कहा गया, “भालुओं को कभी मत मारना!” वहीं एक व्यक्ति बार-बार फोन करके मांग करता रहा कि उसे सीधे गवर्नर से बात कराई जाए.
एक अन्य मामले में, पकड़े गए भालू को छोड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन को बड़ी संख्या में टिप्पणियां मिलीं. इनमें कुछ लोगों ने सवाल किया, “आपने उसे मारा क्यों नहीं?”
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि भालुओं से जुड़े मामलों को संभालने वाले एक स्थानीय सरकारी कर्मचारी को वन्य भालुओं की सुरक्षा की वकालत करने वाले एक व्यक्ति ने निशाना बनाया. उस व्यक्ति ने कर्मचारी की बिना अनुमति तस्वीर खींची और उसे ऑनलाइन पोस्ट कर दिया.
जापान के आंतरिक मामलों और संचार मंत्रालय ने पिछले साल जुलाई में सर्वेक्षण शुरू किया था. मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे कर्मचारियों पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने की जरूरत है.
यह समस्या ऐसे समय में सामने आई है जब जापान में इंसानों और भालुओं के बीच मुठभेड़ों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तक समाप्त हुए एक वर्ष में भालुओं के साथ 50,000 से अधिक मुठभेड़ दर्ज की गईं, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी और अब तक का रिकॉर्ड स्तर है.
भालुओं की बढ़ती गतिविधि ने जापान के कई इलाकों में सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ स्थानीय प्रशासन को लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव संरक्षण समर्थक भालुओं को मारने के बजाय दूसरे उपाय अपनाने की मांग कर रहे हैं.
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केआर/