
नई दिल्ली, 17 जून . महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक्त ‘ऑपरेशन टाइगर’ की खूब चर्चा चल रही है. ऐसी खबरें चल रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं. इन खबरों को लेकर इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने भाजपा पर निशाना साधा है.
शिवसेना (यूबीटी) में फूट की अटकलों पर कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि ये ‘ऑपरेशन टाइगर’ या ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसी बातें कहां से आती हैं? ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. जो लोग पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित हैं, वे कभी अलग नहीं होंगे. पार्टी छोड़कर जाने वालों की चिंता करने का क्या मतलब है? उन्होंने टीएमसी सांसदों का जिक्र किया और कहा कि उन सांसदों के बारे में क्या कहा जाए, जो सदन में हमारे साथ थे, लेकिन देखिए वे अब क्या कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि विचारधारा से जुड़े लोग हिल नहीं सकते हैं. इंडिया ब्लॉक के सांसदों को स्थित रहना चाहिए. हमारे पास ऑफर लेकर क्यों नहीं आते, क्योंकि उन्हें पता है कि हमारी विचारधारा क्या है, हम नहीं बिकेंगे.
एनसीपी (एसपी) सांसद सुरेश म्हात्रे ने कहा कि अभी हमारी पार्टी अलग है, इसलिए भले ही हम उन पर नजर रखें, लेकिन हम उनके मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि उनकी विचारधारा अलग है. शिवसेना की विचारधारा अलग है, हमारी विचारधारा अलग है और हमारी पार्टियां भी अलग-अलग हैं. हम इंडिया गठबंधन में साथ हैं, फिर भी हम अलग-अलग पार्टियां हैं, इसलिए हम ऐसे मामलों में दखल नहीं देते और न ही सवाल उठाते हैं.
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की राजनीति पहले ही दिल्ली तक पहुंच चुकी है और जैसा कि आप जानते हैं, दिल्ली में सत्ता के केंद्र को भी लंबे समय से महाराष्ट्र की जरूरत रही है. यह महाराष्ट्र की ताकत को दिखाता है. जहां तक अभी हो रही घटनाओं की बात है, तो आज शाम तक हमारे पास पूरी जानकारी आ जाएगी और फिर हम इस पर कोई फैसला लेंगे. सवाल यह है कि जिस पार्टी ने आपको टिकट दिया और आप चुनाव जीते, तो इंसानियत कहती है कि पांच साल तो उसी पार्टी में रहना चाहिए.
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ बाघों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया था. जब हमारे जंगलों में बाघों की संख्या कम हो जाती है तो ‘ऑपरेशन टाइगर’ का मकसद और बाघ लाकर उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यहां हमारे सांसदों की संख्या घटाई जा रही है और उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म किया जा रहा है, इसलिए यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ कम और बाघों को मारने वाला ऑपरेशन ज्यादा लग रहा है.
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों का काम ऑपरेशन करना होता है और नेता कब से ऑपरेशन करने लगे हैं. 2029 के चुनाव में जनता चाहेगी तो भाजपा को 500 सीटें दे देगी, लेकिन दूसरे दलों के सांसदों को अपने खेमे में ले लेना, यह कैसी राजनीति है.
दुबे ने कहा कि 2022 में हमारी पार्टी पहली बार टूटी थी. हमने इसे स्वीकार किया और मुकाबला किया. हम कोर्ट गए और मामला कानूनी लड़ाई बन गया, लेकिन अब 2026 में हमारी पार्टी को एक बार फिर तोड़ा जा रहा है. एक बात जो हमारी समझ में नहीं आती, वह यह है कि दूसरी तरफ की सत्ता की भूख कब खत्म होगी.
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डीकेएम/डीकेपी