बीना भाभी पर टाइपकास्ट के सवाल पर रसिका दुग्गल ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- मंटो और दिल्ली क्राइम ने बचाया

मुंबई, 14 सितंबर . अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने मिर्जापुर: द मूवी में बीना त्रिपाठी (बीना भाभी) के किरदार से वापसी की है. अभिनेत्री का कहना है कि बिना एक सर्वाइवर है, उसे पता है कि उसकी कमजोरियां क्या हैं और उन्हें अपने फायदे के लिए कैसे इस्तेमाल करना है.

अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म देखने के बाद लोगों को पता चलेगा कि बीना भाभी बीना कैसे बनी. मूवी के दौरान जिंदगी और उसके एटीट्यूड को एक कॉन्टेक्सट मिलता है.

ने अभिनेत्री से सवाल किया, “मिर्जापुर के बाद, आपकी पहचान बीना से मजबूती से हो गई है, लेकिन आपने मंटो, दिल्ली क्राइम और शेखर होम जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी रेंज भी बनाई है. क्या बीना के बाद कभी टाइपकास्ट होने का प्रेशर था और क्या आप जान-बूझकर इससे अलग होना चाहती थी.”

अभिनेत्री ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा, “मंटो, मिर्जापुर से ठीक पहले रिलीज हुई थी और दिल्ली क्राइम मिर्जापुर के ठीक बाद रिलीज हुई थी. दोनों में, फिजिकली, लुक और कैरेक्टर के मामले में, मेरा रोल बीना से बहुत अलग हैं. इसीलिए मैं टाइपकास्ट होने से बची. इन सभी कैरेक्टर में एक वर्सेटिलिटी थी जिसे मुझे एक्सप्लोर करने और दूसरों के सामने दिखाने का मौका मिला.”

उन्होंने कहा, “बीना ने मुझे फेम, बहुत ज्यादा ऑडियंस और एक बॉक्स-ऑफिस हिट भी दी है. मंटों में सफिया का किरदार बहुक इंपॉर्टेंट रहेगा क्योंकि मुझे लगता है कि यह एक मशहूर राइटर की कहानी है, लेकिन उनकी कहानी बताते हुए, फिल्म उनकी पत्नी की कहानी को नजरअंदाज नहीं करती. डायरेक्टर का यही इरादा था. वह नंदिता दास जैसी सेंसिटिव डायरेक्टर थीं और एक टैलेंटेड और सेंसिटिव को-एक्टर थीं जिन्होंने सफिया को कभी सेकेंडरी कैरेक्टर नहीं माना. सफिया की कहानी बहुत खूबसूरती से बताई गई है, जबकि मंटो के बारे में बहुत कुछ लिखा और बताया गया है. कभी-कभी ऐसा होता है कि हम मर्दों की कहानियां याद रखते हैं और औरतों की कहानियाँ भूल जाते हैं.

एनएस/पीएम