
पटना, 16 सितंबर . यूपीआई चार्ज पर राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार जनता की जेब खाली करने और देश को कंगाल बनाने का काम कर रही है.
भाई वीरेंद्र ने से बात करते हुए कहा, “ये एनडीए की सरकार जनता के मेहनत की कमाई को लूटना चाहती है. देश में महंगाई चरम पर है, बेरोजगारी है, अपराध पर लगाम नहीं लग रहा है और सरकार नए-नए तरीके से जनता पर बोझ डाल रही है.”
उन्होंने जेन जी और युवाओं से अपील करते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि आप दल-भेद छोड़कर सड़क पर आएं. किसी नेता पर भरोसा मत कीजिए, देश को बचाना आपका कर्तव्य है. देश का भविष्य आप हैं. जब जेन जी और नौजवान सड़क पर आएंगे, तभी देश की तस्वीर बदलेगी.”
यूसीसी विवाद पर भाई वीरेंद्र ने कहा कि एनडीए सरकार महंगाई, बेरोजगारी और अपराध को नियंत्रित करने में विफल रही है, इसलिए ध्यान भटकाने के लिए यूसीसी की बात कर रही है. उन्होंने कहा, “यूसीसी की बात इसलिए हो रही है क्योंकि सरकार फेल हो गई है. आप इसे कैसे लागू करेंगे? देश की आजादी के लिए हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी ने बलिदान दिया है. यह धर्मनिरपेक्ष देश है, किसी एक धर्म का नहीं. हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार संविधान देता है.”
उन्होंने कहा कि देश में हालात खराब हैं और इससे ध्यान हटाने के लिए गृह मंत्री भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की बात कर रहे हैं, जिसका वह विरोध करते हैं. उन्होंने कहा, “मैं जेन जी से कहूंगा कि वे ज्यादातर नेताओं पर भरोसा न करें, सड़कों पर उतरें, हम उनके साथ हैं.”
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर कहा, “नीतीश कुमार समाजवादी बैकग्राउंड से हैं और उन्होंने कहा था कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने देंगे, इसलिए हम उनसे मांग करते हैं कि वे हमारे साथ महागठबंधन में शामिल हों. हम सरकार बनाएंगे और देश में कहीं भी यूसीसी लागू नहीं होने देंगे.”
बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने बिहार आ रही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली कमेटी पर भी भाई वीरेंद्र ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “केंद्रीय मंत्री और टीमें आती रहती हैं लेकिन शिवराज सिंह चौहान जब आपदा और बाढ़ का जायजा लेने आ रहे हैं, तो पहले बताएं कि कितना पैसा ला रहे हैं. क्या बिहार को कोई विशेष पैकेज दिया जा रहा है.”
उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित लोगों के लिए 7,000 रुपये से कुछ नहीं होगा. इस महंगाई के दौर में हर परिवार को कम से कम 25,000 रुपये दिए जाने चाहिए, तभी उन्हें लगेगा कि सरकार ने कुछ मदद की है.
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