
नई दिल्ली, 21 जुलाई . भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस’ शुरू किया है. इस विशेष प्रशिक्षण ऑपरेशन में 26 देशों के समुद्री विशेषज्ञ शामिल हुए हैं. यह एक बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम है. यहां नार्कोटिक्स के खिलाफ कार्रवाई, समुद्री खतरों, समुद्री जहाज पर आग व विपरीत परिस्थितियों में समुद्र में जिंदा रहने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण भारत में पहली बार आयोजित किया गया है.
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन ही संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय ने लाल सागर और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरते समुद्री सुरक्षा खतरों पर विशेष सत्र आयोजित किया. कार्यक्रम की थीम पोत प्रबंधन और विशेष प्रशिक्षण रखी गई. इस दौरान प्रतिभागियों ने विषय विशेषज्ञों के साथ पेशेवर संवाद किया और विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों में भाग लिया.
इसके बाद प्रतिभागियों को पोत संचालन, नौवहन, खगोलीय नौवहन, समुद्री संकट संचार प्रणाली, क्षति नियंत्रण और अग्निशमन जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. इसके लिए भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक सिमुलेटरों और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग किया गया. आगामी तीन दिनों के दौरान प्रतिभागी विभिन्न पेशेवर सत्रों, सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे.
कार्यक्रम में समकालीन समुद्री सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है, जिससे भाग लेने वाले देशों की क्षमता निर्माण, परिचालन समन्वय और सामूहिक समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके. ‘ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2’, भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान मुख्यालय, कोच्चि में शुरू हुआ है. यह चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम है. भारतीय नौसेना के नेतृत्व वाली संयुक्त कार्यबल-154 के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन संयुक्त समुद्री बलों के सहयोग से किया जा रहा है.
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 26 देशों के 254 प्रतिभागी, 74 प्रशिक्षक तथा चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और विषय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं. भारत में पहली बार आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम को भारतीय नौसेना और संयुक्त समुद्री बलों के बीच बढ़ते सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है. संयुक्त समुद्री बलों की प्रशिक्षण इकाई संयुक्त कार्यबल-154 का नेतृत्व वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास है.
इसका उद्देश्य साझेदार देशों की समुद्री क्षमताओं, आपसी तालमेल और पेशेवर तैयारी को मजबूत बनाना है. नौसेना के मुताबिक, संयुक्त कार्यबल-154 के कमांडर कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी ने यहां अपना महत्वपूर्ण संबोधन दिया. संयुक्त समुद्री बलों के उप कमांडर कमोडोर डैन थॉमस ने उद्घाटन भाषण दिया, जबकि दक्षिणी नौसैनिक कमान मुख्यालय के प्रशिक्षण प्रमुख रियर एडमिरल दीपक सिंघल ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया.
वक्ताओं ने समुद्री सुरक्षा से जुड़ी समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण, अनुभवों के आदान-प्रदान और बहुराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया.
भारतीय नौसेना के अनुसार यह प्रशिक्षण कार्यक्रम क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने, समुद्री सुरक्षा संबंधी साझा चुनौतियों से निपटने तथा सहभागी देशों के बीच पेशेवर संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. दक्षिणी नौसैनिक कमान द्वारा आयोजित यह पहल क्षेत्र में भारतीय नौसेना की पसंदीदा सुरक्षा और प्रशिक्षण साझेदार की भूमिका को भी और सुदृढ़ करती है.
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जीसीबी/एसके