
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर बंगाल की खाड़ी में भारतीय और सिंगापुर की नौसेनाएं अपनी समुद्री युद्ध क्षमता व समन्वय प्रदर्शित कर रही हैं. दोनों देशों के युद्धपोत पनडुब्बियों का पता लगाने, दुश्मन के जहाजों से मुकाबला करने और हवाई हमलों के विरुद्ध कार्रवाई करने का अभ्यास कर रहे हैं. द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘सिम्बेक्स-2026’ के समुद्री चरण में यह अभियान शुरू किया गया है. 26 अक्टूबर को इस अभियान का अंतिम दिन है. इस अभ्यास में दोनों नौसेनाएं बिलकुल वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों के अनुरूप सामरिक गतिविधियों को अंजाम दे रही हैं.
यह इस अभ्यास का दूसरा और आखिरी चरण है. 24 अक्टूबर से प्रारंभ हुआ यह समुद्री अभ्यास 26 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में जारी रहेगा. समुद्री चरण के दौरान दोनों नौसेनाएं अपनी परिचालन क्षमताओं को परख रही हैं. इसमें पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने, दुश्मन के सतही जहाजों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा हवाई खतरों का मुकाबला करने का अभ्यास किया जा रहा है. जहाजों के संचालन और विभिन्न सामरिक युद्धाभ्यास के जरिए दोनों नौसेनाएं समुद्र में आपसी तालमेल को भी मजबूत कर रही हैं.
यह अभ्यास 21 अक्टूबर को विशाखापत्तनम में शुरू हुआ था. इसमें हिस्सा लेने के लिए सिंगापुर नौसेना का युद्धपोत आरएसएस सुप्रीम विशाखापत्तनम पहुंचा था. उद्घाटन समारोह भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि और आईएनएस कमोर्टा पर आयोजित किया गया था. इसमें पूर्वी नौसेना कमान के मुख्य स्टाफ अधिकारी (संचालन), सिंगापुर नौसेना के बेड़ा कमांडर और दोनों देशों की नौसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
‘सिम्बेक्स-2026’ का पहला चरण में 21 से 23 अक्टूबर तक विशाखापत्तनम में बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों से संबंधित था. इस दौरान दोनों देशों के नौसैनिक अधिकारियों ने पेशेवर चर्चाओं, विशेषज्ञों के विचार-विमर्श, युद्धपोतों के दौरे और अभियान संबंधी योजना बनाने की बैठकों में हिस्सा लिया था. 1994 में शुरू हुआ था नौसैनिक सहयोग भारत और सिंगापुर के बीच इस नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत 1994 में ‘एक्सरसाइज लायन किंग’ के नाम से हुई थी. समय के साथ यह अभ्यास दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है.
इसके जरिए दोनों नौसेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने, अनुभव साझा करने और संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिलता है. ‘सिम्बेक्स-2026’ का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं की परिचालन क्षमता और साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने की तैयारी को मजबूत करना है. साथ ही, यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत और सिंगापुर की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है.
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जीसीबी पीएम