
नई दिल्ली, 14 अगस्त . संसद के मानसून सत्र में लगातार बने गतिरोध को लेकर केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष और खासकर कांग्रेस की आलोचना की है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के निर्देश पर विपक्ष सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा था.
केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि कि विपक्ष न तो सदन को चलने देना चाहता है और न ही चर्चा के जरिए मुद्दों का समाधान चाहता है. निर्देश सीधे राहुल गांधी से आ रहे हैं, किसी और से नहीं. विपक्ष ने शुरुआत में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी और चर्चा होने के बाद सदन को सुचारू रूप से चलने देने की बात कही थी, हालांकि बाद में विपक्ष ने अपने मुद्दे बदल दिए और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई समेत अन्य विषयों पर चर्चा की मांग शुरू कर दी.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को सभी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई थी. इसमें विपक्ष की प्रमुख मांग नीट पेपर लीक पर चर्चा की थी.
मेघवाल ने कहा कि चर्चा के नियम और प्रक्रिया को लेकर शुरुआती दो दिनों में गतिरोध रहा, लेकिन अंततः इस मुद्दे पर चर्चा हुई. इसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को उठाने लगे.
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर चर्चा चाहती थी, जबकि कांग्रेस छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाना चाहती थी. विपक्ष इस बात पर भी एकमत नहीं था कि सदन में किस विषय पर चर्चा की जाए.
बिना चर्चा विधेयक पारित होने के आरोपों पर मेघवाल ने कहा कि सरकार की ऐसी कोई इच्छा नहीं थी. उन्होंने कहा कि सरकार विधेयकों को चर्चा के बाद ही पारित कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कई बार बिना चर्चा के कानून पारित करने की स्थिति बनी. उन्होंने इसके लिए विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया.
राहुल गांधी के आरोपों पर भी मेघवाल ने कड़ा पलटवार किया. उन्होंने राहुल गांधी पर “झूठ बोलने” और सदन की मर्यादा का पालन नहीं करने का आरोप लगाया.
मेघवाल ने कहा कि ऊंचे पद पर बैठे लोगों, यहां तक कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के खिलाफ भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना कांग्रेस नेतृत्व की आदत बन गई है. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नए निर्वाचित सांसद भी इस तरह के व्यवहार से परेशान हैं.
वहीं, मानसून सत्र के आखिरी दिन गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने को लेकर विपक्ष के सवालों पर मेघवाल ने कहा कि सरकार ने विपक्ष से चर्चा के लिए औपचारिक नोटिस देने को कहा था. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष नियम 193 के तहत चर्चा चाहता था तो उसके तहत नोटिस देना चाहिए था. इसी तरह यदि नियम 184 के तहत चर्चा की मांग थी तो संबंधित नोटिस दिया जाना चाहिए था.
मेघवाल ने कहा कि विपक्ष ने ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया. उनके अनुसार, चर्चा के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन होने पर ही संबंधित मंत्री सदन में उस चर्चा में भाग लेते. उन्होंने विपक्ष पर मुद्दों को राजनीतिक रूप से उठाने और सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की है. सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी बड़ी होने की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि लगातार हंगामा करेगा और चर्चा में हिस्सा नहीं लेगा तो सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना मुश्किल होगा.
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एसएके/वीसी