
नई दिल्ली, 27 जुलाई . संसद के मॉनसून सत्र में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर एके-47 चलाने पर जवाब मांगा है. सांसदों ने कहा कि इस तरह छात्रों के साथ सख्ती करना गलत है और इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है.
उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी आतंकवादी थे, जो उनके खिलाफ बंदूकें और एके-47 जैसी हथियारों की जरूरत पड़ी. छात्रों के आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया जा रहा है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्राओं के परिवारों को फोन कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं को अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए.
कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने भी इस मुद्दे को संसद में उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब मांगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में प्रदर्शनकारियों के बीच एके-47 और दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किस स्तर से दिया गया, इसकी जानकारी सरकार को देनी चाहिए. गृह मंत्री को संसद में आकर इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी.
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शन से निपटने के लिए पुलिस के पास चरणबद्ध प्रक्रिया होती है. पहले निषेधाज्ञा की जानकारी दी जाती है, फिर जरूरत पड़ने पर वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसे विकल्प अपनाए जाते हैं. गोलीबारी या अत्यधिक बल का इस्तेमाल केवल बेहद गंभीर परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए.
मनीष तिवारी ने बिहार के मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई पुलिसकर्मी एके-47 लेकर छात्रों के पीछे दौड़ता दिखाई देता है तो यह गंभीर मामला है. उन्होंने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि बिना स्पष्ट आदेश के बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने Supreme Court द्वारा बनाए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा की मांग की.
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी दिल्ली और बिहार की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के दौरान कीलों का इस्तेमाल किया गया और पैलेट गन चलाई गई, जबकि बिहार में छात्रों के खिलाफ एके-47 दिखाई दी. उन्होंने कहा कि सरकार को बताना होगा कि इस तरह की कार्रवाई के आदेश किसने दिए.
वहीं, कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे को उठाया. उन्होंने कहा कि पहले भी पेपर लीक की घटनाओं की जांच के लिए समितियां बनाई गई थीं, लेकिन उनकी रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई. उन्होंने मांग की कि नई समितियां केवल औपचारिकता तक सीमित न रहें और उनकी सिफारिशों पर ठोस कदम उठाए जाएं.
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी छात्रों पर कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में युवाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं. बिहार में एके-47 से जुड़ी घटना को उन्होंने बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में लोगों की आवाज दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई. उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्र आतंकवादी हैं या अपराधी. उन्होंने दावा किया कि बिहार में बड़ी संख्या में छात्रों को गिरफ्तार किया गया है और इससे डर का माहौल पैदा हो रहा है.
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एसएके/पीएम