विपक्षी दल जानबूझकर संसद की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं : प्रवीण खंडेलवाल

नई दिल्ली, 6 अगस्त . भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने गुरुवार को कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने से बातचीत में कहा कि संसद की कार्यवाही बाधित करना कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की सुनियोजित साजिश है.

खंडेलवाल ने कहा कि ऐसा करके यह लोग संसद के बाहर भी चुनौतियों को पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और संसद के अंदर भी स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं, ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सके. जिस प्रकार से ये लोग संसद की कार्यवाही के दौरान बाधा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, उससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि ये लोग सुचारू चर्चा के पक्ष में नहीं हैं. ये लोग इस बात को भलीभांति जानते हैं कि अगर संसद में सुचारू चर्चा होगी, तो इन लोगों की कलई खुलकर सामने आ जाएगी. ये लोग न ही संसद के बाहर चर्चा कर रहे हैं और न ही संसद के अंदर. एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस तरह की स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती है.

भाजपा सांसद ने कहा कि जो लोग भी संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे सभी लोगों को पूरा देश देख रहा है. आगामी दिनों में इन सभी लोगों को सही जवाब दिया जाएगा. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं. छात्रों से जुड़े मुद्दे का प्रधानमंत्री ने संज्ञान लिया और उस संबंध में बाकायदा संसद में कानून भी बनाए. इसके बाद उस विषय पर शोर मचाने की कोई आवश्यकता नहीं है. लेकिन, कांग्रेस के नेता बेरोजगार हैं, जिनके पास कोई काम नहीं है. देश की जनता हर चुनाव में इन लोगों को रिजेक्ट करती है. इसी वजह से ये लोग अकारण इन मुद्दों को उठा कर संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेण रिरिजू को लेकर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि रिजिजू संसदीय कार्यमंत्री हैं. वह कोई भी निर्णय अन्य मंत्रियों के मंत्रणा करके लेंगे. अब आगामी दिनों में विशेष सत्र बुलाया जाए या कोई और कदम उठाया जाए, वो आने वाली परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा. इस संबंध में पूरी रूपरेखा आगामी दिनों में निर्धारित कर ली जाएगी.

उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने हमेशा से एक-दूसरे का साथ देकर ही चुनाव लड़ा है. इसे इन लोगों ने कथित गठबंधन का नाम दिया है. जब इन लोगों को परिस्थिति विपरीत जाती हुई दिखती है, तो ये लोग एक हो जाते हैं. लेकिन, एक स्वस्थ राजनीति में इस तरह की स्थिति को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

भाजपा सांसद ने एफसीआरए बिल को लेकर कहा कि यह इसलिए जरूरी हो जाता है कि जो पैसे हमें विदेश से प्राप्त होते हैं, उसका यहां पर किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह जानने का अधिकार हर सरकार को है. अगर सरकार की ओर से एफसीआरए बिल लाया जा रहा है, तो मेरा सीधा सा सवाल है कि विपक्षी दलों को इससे ऐतराज क्यों है? क्या सिर्फ इसलिए कि इन लोगों में से किसी के पास विदेशी फंडिंग आती है और इस बिल के लागू होने के बाद उनसे इस बारे में हिसाब लिया जाएगा. मुझे लगता है कि विपक्षी दलों की ओर से एफसीआर का विरोध पूरी तरह से निरर्थक है.

एसएचके/एबीएम