बिहार में पंचायतों को आय के नए स्रोत विकसित करने होंगे : दीपक प्रकाश

पटना, 6 जुलाई . बिहार के ग्रामीण इलाकों में पंचायत टैक्स को लेकर प्रस्तावित नई व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है. इस योजना के तहत हर परिवार से औसतन सालाना 1200 रुपये तक के संसाधन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. इसे लेकर राज्य के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि यह प्रस्ताव 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों का हिस्सा है और इसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है.

दीपक प्रकाश ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वित्त आयोग द्वारा बिहार की पंचायती राज संस्थाओं के लिए अगले पांच वर्षों में लगभग 51,923 करोड़ रुपये की अनुशंसा की गई है. इस राशि में से लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा आरएलबी (रूरल लोकल बॉडी) परफॉर्मेंस ग्रांट से जुड़ा है, जिसके तहत पंचायतों को अपने स्तर पर आय के संसाधन विकसित करने होंगे. इसी संदर्भ में प्रति परिवार औसतन 1200 रुपये वार्षिक संग्रह का लक्ष्य रखा गया है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर परिवार से सीधे इतनी राशि वसूली जाएगी बल्कि यह एक औसत और लक्ष्य आधारित आंकड़ा है, जिसे पंचायतें अपने संसाधनों के आधार पर पूरा कर सकती हैं.

उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास आय के कई वैकल्पिक स्रोत भी हो सकते हैं. उदाहरण के तौर पर पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध खाली जमीन का उपयोग, तालाब निर्माण, मत्स्य पालन, सामुदायिक संसाधनों का विकास और स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे आय सृजन कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर भी राजस्व अर्जित किया जा सकता है. उनका कहना था कि उद्देश्य यह है कि पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने स्तर पर भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें.

दीपक प्रकाश ने यह भी कहा कि सरकार की कोशिश है कि इस प्रक्रिया में आम जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े. पंचायतों को यह स्वतंत्रता दी जाएगी कि वे अपने स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आय के स्रोत विकसित करें. उन्होंने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा एक वर्कशॉप आयोजित की गई थी, जिसमें इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई. उस बैठक में बिहार की ओर से यह आपत्ति भी दर्ज कराई गई कि इस शर्त में राज्य को कुछ रियायत दी जानी चाहिए, क्योंकि राज्य अभी अपने स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) को विकसित करने की प्रक्रिया में है. बिहार सरकार ने इस संबंध में छूट की मांग भी रखी है.

उन्होंने कहा कि इस पूरे मुद्दे को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक रिपोर्ट और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें. सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है.

इसी बातचीत के दौरान जब जिला स्तर पर आयोजित ‘सहयोग कार्यक्रम’ में असंतुष्ट शिकायतकर्ताओं के पटना स्तर पर शामिल होने को लेकर सवाल किया गया, तो दीपक प्रकाश ने कहा कि यह एक सकारात्मक व्यवस्था है. उन्होंने बताया कि किसी भी प्रशासनिक प्रणाली में एक अपीलीय प्राधिकरण (अपील अथॉरिटी) का होना आवश्यक होता है, ताकि यदि कोई व्यक्ति निचले स्तर पर संतुष्ट नहीं है तो वह उच्च स्तर पर अपनी बात रख सके. उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य कदम बताया.

बांकीपुर उपचुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपक प्रकाश ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों पर जनता का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है. उन्होंने विश्वास जताया कि एनडीए एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन करेगा और सीट पर जीत दर्ज करेगा.

इसके अलावा, बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपक प्रकाश ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने कहा कि मामलों का त्वरित निपटारा होने से आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा. यह कदम न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी और तेज बनाने में मदद करेगा. उन्होंने इस पहल को पूरी तरह से स्वागत योग्य और जनहितकारी बताया.

पीआईएम/पीएम